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	<title>उत्तराखंड &#8211; Ameer Bharat | अमीर भारत</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment News</description>
	<lastBuildDate>Sun, 28 Jun 2026 12:33:50 +0000</lastBuildDate>
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		<title>सुबह से चढ़ा पारा, मैदानी इलाकों में फिलहाल बारिश के आसार नहीं, गर्मी करेगी परेशान</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161290/</link>
		
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		<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 12:33:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में फिलहाल बारिश के आसार नहीं है। ऐसे में गर्मी के साथ उमस परेशान करेगी। हालांकि पर्वतीय जिलों के कुछ हिस्सों में तेज आंधी चलने से परेशानियां बढ़ सकती है। इस साल मानसून करीब सप्ताह भर की देरी से प्रदेश में पहुंचेगा। आंकड़ों पर नजर डालें तो शनिवार को दून का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="822" height="463" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27.jpg 822w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27-768x433.jpg 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 822px) 100vw, 822px"></p>
<p>उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में फिलहाल बारिश के आसार नहीं है। ऐसे में गर्मी के साथ उमस परेशान करेगी। हालांकि पर्वतीय जिलों के कुछ हिस्सों में तेज आंधी चलने से परेशानियां बढ़ सकती है।</p>
<p>इस साल मानसून करीब सप्ताह भर की देरी से प्रदेश में पहुंचेगा। आंकड़ों पर नजर डालें तो शनिवार को दून का अधिकतम तापमान सामान्य से 4.9 डिग्री बढ़ोतरी के साथ 37.0 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले बीते शुक्रवार को भी अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री बढ़ोतरी के साथ 36.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। दिनभर चटक धूप और गर्म हवाओं के चलने से उमस बढ़ गई है। उधर पर्वतीय इलाकों में भी दिन के समय चटक धूप खिलने से गर्मी परेशान कर रही है।</p>
<p>मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार 28 जून को पर्वतीय जिलों के कुछ इलाकों में बिजली चमकने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मैदानी इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। दून में दिन का अधिकतम तापमान 37 और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री रहने के आसार हैं।</p>
</div>
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		<title>चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर सेना के जवानों का रोमांचकारी प्रदर्शन</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161288/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 09:33:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[सोमवार को सेना के पैरा यूनिट के जवानों द्वारा पैराग्लाइडिंग का अभ्यास किया जाएगा। इससे पहले जवानों ने आज पैराग्लाइडिंग का रोमांचकारी प्रदर्शन किया। चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर आज सेना के जवानों ने इंजन चलित सिंगल और डबल सीटर पैरा ग्लाइडर से हवाई अड्डे के ऊपर रोमांचकारी प्रदर्शन किया। आसपास के निवासी सेना के पैराग्लाइडिंग &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="812" height="463" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/8-15.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/8-15.jpg 812w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/8-15-768x438.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 812px) 100vw, 812px"></p>
<p>सोमवार को सेना के पैरा यूनिट के जवानों द्वारा पैराग्लाइडिंग का अभ्यास किया जाएगा। इससे पहले जवानों ने आज पैराग्लाइडिंग का रोमांचकारी प्रदर्शन किया।</p>
<p>चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर आज सेना के जवानों ने इंजन चलित सिंगल और डबल सीटर पैरा ग्लाइडर से हवाई अड्डे के ऊपर रोमांचकारी प्रदर्शन किया। आसपास के निवासी सेना के पैराग्लाइडिंग के प्रदर्शन का लुत्फ उठा रहे हैं।</p>
<p>वहीं, सोमवार को सेना के पैरा यूनिट के जवानों द्वारा 20-25 हजार की ऊंचाई से एएन 32 विमान से पैराशूट का अभ्यास करने के लिए सेना और वायुसेना के अधिकारी और जवान कम्युनिकेशन और अन्य आवश्यक सुविधाएं जुटाने की तैयारियां कर रहे हैं।</p>
</div>
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		<title>जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए 65 करोड़ !</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161268/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 09:32:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[रुद्रपुर में कृषि विभाग द्वारा आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कृषि मंत्री गणेश जोशी तथा जनपद प्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा ने किया। इस अवसर पर ₹46.32 करोड़ की लागत से निर्मित 9 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1028" height="633" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-36.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-36.jpg 1028w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/1-36-768x473.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1028px) 100vw, 1028px"></p>
<p>रुद्रपुर में कृषि विभाग द्वारा आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कृषि मंत्री गणेश जोशी तथा जनपद प्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा ने किया। इस अवसर पर ₹46.32 करोड़ की लागत से निर्मित 9 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा ₹323.34 करोड़ की लागत के 32 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। इस प्रकार कुल ₹369.66 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया।</p>
<p>केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब खेत बचेंगे तो जमीन बचेगी, जमीन बचेगी तो पृथ्वी बचेगी और पृथ्वी बचेगी तो जीवन सुरक्षित रहेगा।उन्होंने किसानों से मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि भूमि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी धरती माता है, जिसका संरक्षण हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और निकट भविष्य में हॉर्टिकल्चर हब के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा। इस दिशा में भारत सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि सेब, अखरोट एवं बादाम सहित उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों के उत्पादन हेतु मुक्तेश्वर में ₹100 करोड़ की लागत से क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किया जाएगा। बड़ी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹4 करोड़ तथा छोटी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹2 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि चौबटिया (अल्मोड़ा) में ₹15 करोड़ की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त न्यूजीलैंड के सहयोग से उत्तराखण्ड में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹15 करोड़ की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ (फेंसिंग) कार्य हेतु ₹65 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही प्रदेश में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित करने के लिए ₹104 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की जा रही है, जिससे किसानों को मौसम की सटीक जानकारी समय पर उपलब्ध हो सकेगी तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ और अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वस्थ किसान, स्वस्थ मिट्टी तथा स्वस्थ कृषि व्यवस्था ही विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का जन आंदोलन है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती, कृषि अवसंरचना तथा डिजिटल कृषि मिशन जैसी योजनाओं से किसानों को व्यापक लाभ मिल रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को ₹3 लाख तक का ब्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है। नहरों से सिंचाई की सुविधा निःशुल्क प्रदान की जा रही है तथा फार्म मशीनरी बैंक योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को सशक्त बनाने के लिए रेनफेड फार्मिंग परियोजना भी स्वीकृत की गई है।</p>
</div>
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		<title> केदारनाथ धाम: इस बार मानसून से पहले ही हेली सेवा का संचालन बंद</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161266/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 06:32:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही हेली सेवा का संचालन शुरू किया गया था। 25 जून 2026 तक की यात्रा अवधि में कुल 11800 से अधिक शटल (उड़ान) की। इसमें 1.37 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने हेलिकॉप्टर से केदारनाथ की यात्रा की। चारधाम यात्रा में केदारनाथ हेली सेवा का संचालन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="795" height="458" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-20.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-20.jpg 795w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/7-20-768x442.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 795px) 100vw, 795px"></p>
<p>22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही हेली सेवा का संचालन शुरू किया गया था। 25 जून 2026 तक की यात्रा अवधि में कुल 11800 से अधिक शटल (उड़ान) की। इसमें 1.37 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने हेलिकॉप्टर से केदारनाथ की यात्रा की।</p>
<p>चारधाम यात्रा में केदारनाथ हेली सेवा का संचालन इस बार मानसून आने से पहले बंद कर दिया गया है। डीजीसीए की ओर से 25 जून से आगे हेली सेवा संचालन की अनुमति नहीं दी गई। अब मानसून सीजन समाप्त होने के बाद सितंबर से हेली सेवा दोबारा से संचालित की जाएगी।</p>
<p>22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही हेली सेवा का संचालन शुरू किया गया था। इस बार हेली सेवा के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आठ हेली ऑपरेटरों का चयन किया। गुप्तकाशी, सिरसी, फाटा हेलिपैड से केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा संचालित की जाती है।</p>
<p>हेली ऑपरेटर कंपनी राजस ऐरा स्पोर्ट्स, ट्रांस भारत एविएशन, यूनाइटेड हेली चार्टर्स, हिमालयन हेली सर्विस, पिलिग्रिमेज एविएशन, एरो एयरक्राफ्ट, चिप्सन एविएशन व थंबी एविएशन ने माध्यम से 22 अप्रैल से 25 जून 2026 तक की यात्रा अवधि में कुल 11800 से अधिक शटल (उड़ान) की। इसमें 1.37 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने हेलिकॉप्टर से केदारनाथ की यात्रा की।</p>
<p>यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि डीजीसीए ने 25 जून तक केदारनाथ हेली सेवा की अनुमति दी थी। केदारघाटी में बारिश व मौसम खराब होने से हेली सेवा में सुरक्षा के लिहाज से संचालन को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी है। मानसून सीजन खत्म होने के बाद सितंबर में फिर से हेली सेवा का संचालन किया जाएगा।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Uttarakhand: मानसून में बाढ़ और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील 304 स्थल चिह्नित</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161236/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 09:32:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रदेश में मानसून में बाढ़ और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील 304 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जबकि 113 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। यह कहना है लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज का। उन्होंने यह बात सिंचाई भवन सभागार में मानसून की तैयारियों को लेकर हुई सिंचाई और लोक निर्माण विभाग की बैठक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="645" height="346" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/iuotyoiut.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>प्रदेश में मानसून में बाढ़ और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील 304 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जबकि 113 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। यह कहना है लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज का। उन्होंने यह बात सिंचाई भवन सभागार में मानसून की तैयारियों को लेकर हुई सिंचाई और लोक निर्माण विभाग की बैठक में कही।</p>
<p>मंत्री महाराज ने बताया कि सभी जनपद मुख्यालयों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। देहरादून में भी एक बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे क्रियाशील है। केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के माध्यम से नदियों के जलस्तर और वर्षा के आंकड़े प्रतिदिन प्राप्त किए जा रहे हैं।</p>
<p>राज्य में कुल 113 बाढ़ चौकियां 15 जून से पहले स्थापित कर लीं गई हैं। सड़कों के अवरुद्ध होने पर वैकल्पिक मार्ग तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में अपर सचिव विनीत कुमार, महावीर चौहान, अपर सचिव सिंचाई गरिमा रौंकली, लोनिवि के प्रमुख अभियंता रमेश चंद्र शर्मा, सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष कुमार आदि मौजूद रहे।</p>
<p><strong>जलाशयों के बांधों पर लगातार रखी जा रही निगरानी</strong><br />मानसून से पूर्व नदियों के संवेदनशील स्थलों पर चैनेलाइजेशन का कार्य जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है। विभिन्न शहरों में जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए जीआईएस आधारित जल निकासी योजना तैयार की गई है। हरिद्वार के भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी का कार्य पूरा हो चुका है। सिंचाई विभाग के जलाशयों के बांधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आपात स्थिति के लिए बोल्डर, आरबीएम और रेत की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।</p>
<p><strong>सड़कें बंद होने पर पहले ही लोगों को सूचना देने के निर्देश</strong><br />विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क बंद होने पर लोगों को पहले ही सूचना मिल जाए। इससे यात्री वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। मानसून सीजन को देखते हुए सभी सड़कों के उचित रखरखाव के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने 3946 पैचवर्क के लक्ष्य के मुकाबले 3968 पैचवर्क पूरे किए हैं। हर सीजन में प्रभावित होने वाली 1199 सड़कों के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार रखने को कहा गया है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>निहंगों से विवाद के बाद फैसला: हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए बनेगी SOP</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161238/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 09:32:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्णप्रयाग और नगरासू में निहंगों से विवाद के मामले के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हेमकुंड साहिब यात्रा संचालन के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा, यात्रा पर कोई प्रभाव न पड़े, इसके लिए सख्ती भी करनी पड़ी तो निकट भविष्य में करेंगे और एसओपी भी बनाएंगे। बृहस्पतिवार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="643" height="354" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/it875t7.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>कर्णप्रयाग और नगरासू में निहंगों से विवाद के मामले के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हेमकुंड साहिब यात्रा संचालन के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा, यात्रा पर कोई प्रभाव न पड़े, इसके लिए सख्ती भी करनी पड़ी तो निकट भविष्य में करेंगे और एसओपी भी बनाएंगे।</p>
<p>बृहस्पतिवार को जीएमएस रोड स्थित एक होटल में संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, निहंगों के विवाद का एक प्रकरण हुआ था। उसके बाद वार्ता हुई। इस मामले में कानून ने अपना काम किया है। सभी पक्षों से सबसे बात हो गई और सबको बता भी दिया गया है।</p>
<p>कानून कोई भी हाथ में लेगा तो कानून से बढ़कर कोई नहीं है। इस समय प्रदेश में चारधाम व हेमकुंड साहिब यात्रा चल रही है। देश दुनिया से तीर्थयात्री यात्रा पर आ रहे हैं। यात्रा पर कोई प्रभाव न पड़े, उसके लिए कही पर हमको सख्ती करनी पड़े तो निकट भविष्य में करेंगे। यात्रा के लिए एसओपी भी बनाएंगे।</p>
<p><strong>हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य</strong><br />चारधाम के साथ हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। अब तक हेमकुंड यात्रा के लिए 2.05 लाख से अधिक यात्रियों ने पंजीकरण कराया है। इसमें 1.42 से ज्यादा श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में दर्शन कर चुके हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>देहरादून में घुसे निहंगों का हंगामा: देर रात तक चलती रही तनातनी</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161234/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 06:32:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के विवाद के बाद बृहस्पतिवार को निहंग सिखों का जत्था कुल्हाल बैरियर तोड़कर उत्तराखंड की सीमा में घुस गया। इनमें से कई देर रात देहरादून के धर्मावाला की ओर बढ़ रहे थे, कुछ निहंग तलवारें लहराकर जत्थे का नेतृत्व कर रहे थे, इन्हें रोकने के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="640" height="354" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/uyiruy.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के विवाद के बाद बृहस्पतिवार को निहंग सिखों का जत्था कुल्हाल बैरियर तोड़कर उत्तराखंड की सीमा में घुस गया। इनमें से कई देर रात देहरादून के धर्मावाला की ओर बढ़ रहे थे, कुछ निहंग तलवारें लहराकर जत्थे का नेतृत्व कर रहे थे, इन्हें रोकने के लिए पूरे जिले की पुलिस और अन्य फोर्स मौके पर तैनात थी। लेकिन रात एक बजे तक वह प्रेमनगर नहीं पहुंचे थे, उनकी लोकेशन पुलिस को भी नही पता थी। हालांकि अब मिली जानकारी के अनुसार देर रात सभी लोगों को वापस पांवटा साहिब की तरफ़ भेज दिया गया</p>
<p>चंडीगढ़ से हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड के लिए कूच कर रहे करीब 200 निहंगों को पुलिस-प्रशासन ने कुल्हाल चेक पोस्ट पर बैरियर लगाकर रोका था। इसके बाद पांवटा साहिब गुरुद्वारे में करीब दो घंटे तक प्रशासन, पुलिस और निहंग सिखों के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद कुछ निहंग लौट गए, जबकि 20 से 30 निहंग कुल्हाल पुल पार कर चेकपोस्ट पर पहुंच गए, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया, यहां कई घंटे तक तनातनी चलती रही।</p>
<p>इसके बाद ये निहंग बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए। मौके पर तैनात पुलिस और आईटीबीपी के सामने ही तलवारें लहराते हुए वह देहरादून-पांवटा राजमार्ग की ओर जाने लगे। इस दौरान उन्हें रोकने के लिए पुलिस की ओर से खड़े किए गए दो डंपरों में भी उन्होंने तोड़फोड़ कर दी।</p>
<p>निहंगों के उत्तराखंड की सीमा में घुसने की सूचना पर शासन-प्रशासन ने जिलेेभर से पुलिस और अन्य बलों को मौके के लिए रवाना कर दिया। निहंग हेमकुंड साहिब जाने की बात पर अड़े हुए थे।</p>
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		<title> राजाजी में गूंजेगी दहाड़, कॉर्बेट से पांच और बाघ लाने की मिली मंजूरी</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161210/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2026 06:35:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड में बाघ संरक्षण की महत्वाकांक्षी पहल को नया बल मिला है। राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी-दक्षिणी हिस्से में बाघों की स्थायी और संतुलित आबादी विकसित करने की दिशा में दूसरे चरण की तैयारी शुरू हो गई है। राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="827" height="471" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-15.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-15.jpg 827w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/5-15-768x437.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 827px) 100vw, 827px"></p>
<p>उत्तराखंड में बाघ संरक्षण की महत्वाकांक्षी पहल को नया बल मिला है। राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी-दक्षिणी हिस्से में बाघों की स्थायी और संतुलित आबादी विकसित करने की दिशा में दूसरे चरण की तैयारी शुरू हो गई है।</p>
<p>राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। पार्क प्रशासन को अब कार्बेट नेशनल पार्क से पांच और बाघों को लाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से सहमति मिल गई है। इनमें तीन बाघिन और दो बाघ शामिल हैं। पार्क प्रशासन ने इसके लिए एनटीसीए के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया था। इससे क्षेत्र पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों के कुनबे के विस्तार और जैव विविधता संरक्षण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है।</p>
<p>पिछले कई वर्षों से राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करने के प्रयास किए जा रहे थे। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के मार्गदर्शन में बाघ पुनर्वास परियोजना शुरू की गई थी। इसके तहत दिसंबर 2020 में पहला बाघ सफलतापूर्वक यहां लाया गया था।</p>
<p>वर्ष 2020 से 2025 के बीच कार्बेट से कुल पांच बाघों (तीन बाघिन और दो बाघ) को राजाजी के पश्चिमी क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। सभी बाघों का मेडिकल परीक्षण करने के बाद उन्हें सैटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा गया था, ताकि उनकी गतिविधियों और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा सके। मई 2025 में पांचवें बाघ को मोतीचूर रेंज में छोड़े जाने के साथ परियोजना का पहला चरण पूरा हुआ था।</p>
<p>अब दूसरे चरण के तहत फिर से तीन बाघिन और दो बाघ राजाजी लाए जाएंगे। वन अधिकारियों का मानना है कि इससे पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनका प्राकृतिक प्रजनन भी तेज होगा। इससे न केवल वन्यजीव संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि राजाजी देश के प्रमुख बाघ आवासों में और अधिक मजबूत पहचान बना सकेगा।</p>
<p><strong>पूर्व में उम्मीदों को लगा था झटका<br /></strong>राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन नेशनल पार्क के पश्चिमी हिस्से में बाघों की आबादी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। वर्ष 2024 में यहां बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया तो राजाजी प्रशासन को उम्मीदें भी जगीं, लेकिन इस कवायद को झटका तब लगा जब दो शावकों को गुलदार ने हमला कर शिकार बना लिया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गुलदार के निशान सामने आए थे। हालांकि बाद में दो शावकों का अभी भी पता नहीं चल पाया था। वहीं 2020 से 2025 तक लाए गए पांच बाघों में से तीन बाघों की पार्क की से बाहर चले जाने की आशंका है। जिनमें से एक बाघ कभी कभार पार्क सीमा के भीतर आ जाता है।</p>
<p><strong>बाघ विहीन था पश्चिमी क्षेत्र<br /></strong>राजाजी टाइगर रिजर्व में कुल 55 बाघ हैं। सभी बाघ पूर्वी क्षेत्र में हैं क्योंकि यह क्षेत्र नेशनल कार्बेट पार्क से जुड़ा हुआ है। पश्चिमी हिस्सा बाघ विहीन हो गया था। अत्यधिक मानवीय निर्मित अवरोधों के चलते बाघों का मूवमेंट नहीं हो पा रहा था। राजाजी नेशनल पार्क गंगा के कारण पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में बंटा हुआ है। पूर्वी क्षेत्र में तीन रेंज (गौरी, चोला व रवासन रेंज) और पश्चिमी क्षेत्र में सात रेंज (हरिद्वार, कांसरो, मोतीचूर, धोलखंड, बेरीबाड़ा, चीलावाली व रामगढ़) हैं। पश्चिमी क्षेत्र में मानव निर्मित अवरोध सड़कें व चीला नहर आदि होने से यहां बाघों का मूवमेंट नहीं हो पा रहा था जबकि यहां प्रचुर मात्रा में संसाधन हैं। यह क्षेत्र कहीं ज्यादा बाघों को वहन कर सकता है।</p>
<p><strong>2016 में बनी थी बाघ शिफ्टिंग योजना<br /></strong>राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए बाघ शिफ्टिंग योजना वर्ष 2016 में बनाई गई थी। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से इसे मंजूरी मिली। 24 दिसंबर 2020 को पहले बाघ को मोतीचूर में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद नौ जनवरी 2021 को बाघिन, 20 मई 2023 को बाघिन, 16 मार्च 2024 को बाघिन और अब एक मई 2025 को एक बाघ को यहां शिफ्ट किया गया।</p>
<p>पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में पांच बाघों को फिर लाए जाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) प्रस्तुतीकरण दिया गया है। एनटीसीए ने बाघों को लाने की सहमति दी है। जल्द ही लिखित में यह सहमति प्राप्त हो जाएगी। जिसके बाद अन्य प्रक्रियाएं शुरू होंगी। <strong>– कोको रोशे, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क।</strong></p>
</div>
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		<item>
		<title>उत्तराखंड: गंभीर बीमार और पारिवारिक परिस्थितियों वाले प्रकरण छोड़ अन्य शिक्षकों के तबादले लटके</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161212/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2026 06:35:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। शासन ने गंभीर बीमारियों और विशेष पारिवारिक परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादलों को स्थानांतरण समिति के स्तर से नियमानुसार मंजूरी देने की अनुमति दे दी है, लेकिन दुर्गम से दुर्गम और सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में अनुरोध आधारित अन्य तबादलों पर फैसला &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="789" height="453" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-18.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-18.jpg 789w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/7-18-768x441.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 789px) 100vw, 789px"></p>
<p>उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। शासन ने गंभीर बीमारियों और विशेष पारिवारिक परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादलों को स्थानांतरण समिति के स्तर से नियमानुसार मंजूरी देने की अनुमति दे दी है, लेकिन दुर्गम से दुर्गम और सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में अनुरोध आधारित अन्य तबादलों पर फैसला फिलहाल टल गया है।</p>
<p>शासन ने गंभीर बीमार और पारिवारिक परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादलों के प्रस्ताव को स्थानांतरण समिति के स्तर से किए जाने की मंजूरी दी है, लेकिन दुर्गम से दुर्गम एवं सुगम से दुर्गम क्षेत्र में अनुरोध वाले तबादले लटक गए हैं। शासन ने इन तबादलों पर फिर से विचार के लिए कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को प्रस्ताव भेजा है। वहीं, जिन तबादलों के लिए मंजूरी मिली है, वह भी ऐसे समय पर मिली, जब तबादलों के लिए एक सप्ताह से भी कम समय बचा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन को इसके लिए एक बार फिर समय बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है।</p>
<p>शिक्षा विभाग में शिक्षक पूरे साल दुर्गम से सुगम क्षेत्र में तबादलों के लिए तबादला एक्ट के तहत तबादले का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन पिछले साल जहां तबादला एक्ट के तहत शिक्षकों के तबादले नहीं हो पाए, वहीं सत्र 2026-27 में भी तबादलों के प्रस्तावों को ऐसे समय पर नियुक्ति प्राधिकारी के स्तर पर गठित तबादला समितियों को भेजने की मंजूरी मिली है, जब इसके लिए गिनती के कुछ दिन बचे हैं।</p>
<p>शासन ने जारी आदेश में कहा है कि धारा 27 के तहत चार प्रधानाचार्य, 91 प्रवक्ता, 97 सहायक अध्यापक एलटी गढ़वाल मंडल, 73 सहायक अध्यापक एलटी कुमाऊं मंडल के खुद, पति, पत्नी की गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, बीमार बच्चों, विधवा, विधुर, तलाकशुदा, परित्यक्ता, आपदा प्रभावित एवं माता-पिता की गंभीर बीमारी के आधार पर तबादले प्रस्ताव पर स्थानांतरण समितियां कार्रवाई करेगी। जबकि अनुरोध के आधार पर दुर्गम से दुर्गम और सुगम से दुर्गम क्षेत्र में तबादलों के लिए कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से परामर्श के बाद अगल से आदेश जारी किया जाएगा।</p>
<p><strong>तबादलों के लिए अंतिम तिथि 30 जून<br /></strong>तबादला एक्ट के तहत शिक्षकों, कर्मचारियों के तबादलों के लिए अंतिम तिथि 10 जून है, लेकिन तय समय पर तबादलों की प्रक्रिया पूरी न होने से कार्मिक विभाग ने इसे बढ़ाकर 30 जून किया था, लेकिन शिक्षा विभाग में 30 जून तक तबादले संभव नहीं हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तबादलों के लिए शासन से और समय मांगा गया है। समय मिलने पर ही तबादले किए जा सकेंगे।</p>
<p><strong>तबादलों के लिए अब तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी से भी नहीं ली गई अनुमति<br /></strong>देहरादून। शिक्षा विभाग ने तबादलों के लिए प्रस्ताव को नियुक्ति प्राधिकारी के स्तर पर गठित तबादला समितियों को भेजने की मंजूरी दी हैं, लेकिन तबादलों के लिए अब तक मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से अनुमति नहीं ली गई। जबकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर से स्पष्ट निर्देश है कि राज्य में निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम चल रहा है। इस काम से जुड़े किसी भी अधिकारी का तबादला बिना आयोग की पूर्व अनुमति के न किया जाए।</p>
<p><strong>अनुरोध के आधार पर तबादलों के लिए मांगे जाएंगे नए आवेदन<br /></strong>देहरादून। शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के मुताबिक तबादलों के लिए मिले जिन प्रस्तावों को नियुक्ति प्राधिकारी के स्तर पर गठित तबादला समितियों को भेजा गया है, ये प्रस्ताव पिछले साल के हैं। तबादलों के इन प्रस्तावों के साथ नए आवेदन भी मांगे जाएंगे। वहीं, तबादलों के लिए कार्मिक विभाग से और समय मांगा जाएगा।</p>
</div>
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		<title>नगरासू गुरुद्वारा विवाद: मुख्यमंत्री धामी ने कहा- श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161192/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:32:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों से अपील की कि वे समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास न करें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम व हेमकुंड साहिब यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="635" height="462" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-34.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों से अपील की कि वे समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास न करें।</p>
<p>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम व हेमकुंड साहिब यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों का देवभूमि में स्वागत है। उत्तराखंड आस्था, संस्कृति और प्रकृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील की कि वे देवभूमि के शांत वातावरण में अपनी यात्रा का पूर्ण आनंद लें और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्णप्रयाग और नगरासू में सामने आई घटनाओं के संबंध में सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार, प्रशासन एवं पुलिस आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। जांच में जो भी दोषी पाया गया है, उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई है व सभी तथ्यों के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों से अपील की कि वे समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों ने मिल-जुलकर देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रामक और भड़काऊ खबरें फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>40 लाख से ज्यादा श्रद्धालु कर चुके दर्शन<br /></strong>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चारधाम यात्रा के साथ-साथ हेमकुंड साहिब यात्रा भी सुचारू रूप से संचालित हो रही है। चारधाम यात्रा में अब तक 40 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं, हेमकुंड साहिब यात्रा के शुरुआती दिनों में ही श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 25 हजार अधिक दर्ज की गई है।</p>
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