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	<title>देश-विदेश &#8211; Ameer Bharat | अमीर भारत</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment News</description>
	<lastBuildDate>Wed, 13 May 2026 12:31:33 +0000</lastBuildDate>
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		<title>NEET पेपर लीक में बड़ा एक्शन: केरल से सीकर पहुंचा ‘गैस पेपर’</title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:31:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-2026 कीतीन मई को हुई परीक्षा रद्द की गई है। राजस्थान के सीकर और झुंझुनूं में परीक्षा से दो दिन पहले कई छात्रों को गैस पेपर मिला था। दावा किया जा रहा है कि गैस पेपर के सवाल परीक्षा में आए पेपर के सवालों से मिलते हुए थे। इस मामले &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="780" height="444" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/2-11.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/2-11.jpg 780w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/2-11-768x437.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 780px) 100vw, 780px"></p>
<p>राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-2026 कीतीन मई को हुई परीक्षा रद्द की गई है। राजस्थान के सीकर और झुंझुनूं में परीक्षा से दो दिन पहले कई छात्रों को गैस पेपर मिला था।</p>
<p>दावा किया जा रहा है कि गैस पेपर के सवाल परीक्षा में आए पेपर के सवालों से मिलते हुए थे। इस मामले में राजस्थान एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर आठ मई से जांच शुरू की है।</p>
<p>एसओजी की दो टीमों ने सीकर और झुंझून में पहुंचकर जांच कर कई तथ्य जुटाने के साथ ही कुछ लोगों से पूछताछ भी की थी। इस मामले में अब तक 15 लोगों को पकड़ा है। जानकारी के अनुसार नीट परीक्षा के सात सौ अंकों में से छह सौ अंकों के सवाल सीकर एवं झुंझुनूं के छात्रों को परीक्षा से दो दिन</p>
<p>पहले मिले गैस पेपर से मिलते हुए थे। साथ ही 120 प्रश्न परीक्षा में हूबहू आए थे। सूत्रों के अनुसार गैस पेपर केरल में पढ़ने वाले चूरू जिले के एक एमबीबीएस छात्र ने सीकर में अपने मित्र को भेजा था। इसके बाद यह गैस पेपर सीकर में एक पीजी संचालक को मिला था।</p>
<p>उसने गैस पेपर अपने यहां रहने वाले छात्रों को दे दिया । साथ ही सीकर के करियर काउंसलर राकेश मंडावरिया ने कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले सवाल बताए थे,जिनमें से अधिकांश सवाल परीक्षा में आए थे। उसने अभ्यर्थियों को “गैस पेपर” दिया था। अब एसओजी जांच कर रही है कि करियर काउंसलर तक सवाल कैसे पहुंचे। एसओजी ने राकेश को तीन अन्य लोगों के साथ देहरादून से पकड़ा गया है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार मनीष यादव एवं अविनाश लांबा नामक दो युवको की इस मामले में भूमिका को लेकर जांच की जा रही है। दो दिन पहले एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने कहा था कि नीट परीक्षा-2026 का कथित “गैस पेपर” कई दिनों से छात्रों के पास था।</p>
<p>गैस पेपर में 250 पेज की पीडीएफ है। इसमें से नीट में 410 में से 120 सवाल कैमेस्ट्री (रसायन विज्ञान ) के परीक्षा में आने की बात सामने आई है। इस लिंक में कोई व्यक्ति देहरादून में था,जिससे भी पूछताछ की जा रही है। जांच अभी शुरूआत स्तर पर है। अभी इस बात की जांच की जा रही है कि गैस पेपर कैसे बना ।</p>
<p>जांच पूरी होने से पहले इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी जा सकती है। गहलोत ने सरकार पर निशाना साधा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इंटरनेट मीडिया पर कहा,नीट की परीक्षा रद्दा होना यह दर्शाता है कि बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी। राज्य की भाजपा सरकार ने जानबुझकर गड़बड़ी को दो सप्ताह तक छिपाने की कोशिश की है। भाजपा सरकार का असली चेहरा बेनकाब हो गया।</p>
</div>
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		<title>अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ट्रंप-चिनफिंग की मीटिंग</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/160457/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:31:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इसी तनावपूर्ण माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपनी बीजिंग यात्रा पर निकल रहे हैं जहां वे राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मिलेंगे। ट्रंप ने कई हफ्तों तक चीनी सरकार को यह समझाने की कोशिश की कि वह अपने व्यापक प्रभाव &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="780" height="437" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/1-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/1-8.jpg 780w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/1-8-768x430.jpg 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/1-8-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 780px) 100vw, 780px"></p>
<p>ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इसी तनावपूर्ण माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपनी बीजिंग यात्रा पर निकल रहे हैं जहां वे राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मिलेंगे।</p>
<p>ट्रंप ने कई हफ्तों तक चीनी सरकार को यह समझाने की कोशिश की कि वह अपने व्यापक प्रभाव का इस्तेमाल करके ईरान को दो महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिकी शर्तों पर सहमत कराए या कम से कम महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले। लेकिन, वह अब तक असफल रहे हैं।</p>
<p>एक तरफ वॉशिंगटन की नाराजगी है कि चीन अपने प्रभाव का इस्तेमाल ईरान को झुकाने के लिए नहीं कर रहा, तो दूसरी तरफ बीजिंग इसे ‘जंगल राज’ और एकतरफा दबाव की राजनीति बता रहा है।</p>
<p>इन गंभीर मतभेदों के बावजूद, दोनों महाशक्तियां इस कोशिश में जुटी हैं कि ईरान का मुद्दा उनके द्विपक्षीय संबंधों और व्यापारिक समझौतों को पूरी तरह पटरी से न उतार दे।</p>
<h3 class="wp-block-heading">प्रतिबंधों का वार और कूटनीतिक दीवार</h3>
<p>ट्रंप की यात्रा से ठीक पहले अमेरिका ने ईरानी सेना को संवेदनशील सैटेलाइट इमेज और तेल शोधन में मदद करने वाली चीनी कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाकर इरादे साफ कर दिए हैं।</p>
<p>जवाब में बीजिंग ने अपने पुराने कानून को ढाल बनाकर इन प्रतिबंधों को मानने से इनकार कर दिया। जहां अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव डाले, वहीं शी चिनफिंग ने ईरानी विदेश मंत्री की मेजबानी एवं तेहरान के परमाणु अधिकारों का समर्थन कर यह संदेश दिया है कि चीन अपनी शर्तों पर ही बात करेगा।</p>
<p>आर्थिक हितों की मजबूरी और नाजुक शांति सच्चाई यह है कि न तो ट्रंप फिर से ‘टैरिफ वार’ चाहते हैं और न ही शी चिनफिंग अपनी डगमगाती अर्थव्यवस्था पर नया बोझ।</p>
<p>दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आवाजाही रुकने से चीन को अमेरिका से कहीं अधिक नुकसान हो रहा है। ट्रंप का मानना है कि बंद बंदरगाह और महंगी ऊर्जा चीन की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगी। फिर भी, बीजिंग किसी ऐसी राजनीतिक दलदल में नहीं फंसना चाहता जहां उसे अमेरिका का पक्ष लेते हुए देखा जाए।</p>
<p>माना जा रहा है कि यह शिखर सम्मेलन मतभेदों को सुलझाने से ज्यादा, उन्हें और गहरा होने से रोकने की एक कवायद है। दोनों नेता व्यापारिक स्थिरता और ‘सुपरपावर’ की गरिमा बनाए रखने के लिए ईरान के मुद्दे को एक सीमा तक ही खींचना चाहते हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ट्रंप की ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल शील्ड पर आएगा 1.2 ट्रिलियन डॉलर का खर्च</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/160459/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:31:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी योजना जिसे अमेरिका के लिए गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के रूप में पेश किया गया है की अनुमानित लागत 20 वर्षों में 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होगी। यह जानकारी कांग्रेसनल बजट आफिस के एक नए विश्लेषण से सामने आई है। यह पिछले साल के शुरुआती अनुमान 175 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="780" height="444" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/3-17.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/3-17.jpg 780w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/3-17-768x437.jpg 768w" sizes="(max-width: 780px) 100vw, 780px"></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी योजना जिसे अमेरिका के लिए गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के रूप में पेश किया गया है की अनुमानित लागत 20 वर्षों में 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होगी। यह जानकारी कांग्रेसनल बजट आफिस के एक नए विश्लेषण से सामने आई है।</p>
<p>यह पिछले साल के शुरुआती अनुमान 175 अरब अमेरिकी डॉलर के से कहीं अधिक है। गोल्डन डोम संबंधी का आदेश ट्रंप ने अपने कार्यकाल के पहले सप्ताह में एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से दिया था।</p>
<h2 class="wp-block-heading">कौन सा है सबसे महंगा हिस्सा?</h2>
<p>CBO ने एक रिपोर्ट में कहा, “1.2 ट्रिलियन डॉलर की कुल राशि में से अधिग्रहण की लागत 1 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ी ज्यादा होगी। इस राशि में सिस्टम के मुख्य घटकों की लागत शामिल है। यानी, इंटरसेप्टर लेयर्स और अंतरिक्ष-आधारित मिसाइल चेतावनी और ट्रैकिंग सिस्टम।”</p>
<p>इसमें कहा गया है, “सबसे महंगा हिस्सा अंतरिक्ष-आधारित इंटरसेप्टर लेयर है, जो अधिग्रहण लागत का लगभग 70 प्रतिशत और कुल लागत का 60 प्रतिशत है।”</p>
<h2 class="wp-block-heading">इजरायल की रक्षा प्रणाली से प्रेरित</h2>
<p>इस मिसाइल प्रणाली की अवधारणा आंशिक रूप से इजरायल की बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली से प्रेरित है, जिसे अक्सर सामूहिक रूप से आयरन डोम कहा जाता है, जिसने ईरान के खिलाफ युद्ध में ईरान और सहयोगी आतंकी समूहों के रॉकेट और मिसाइल हमलों से इसकी रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राष्ट्रपति ने 15 स्वास्थ्य योद्धाओं को दिया राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/160447/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:31:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में 15 नर्सिंग कर्मियों को वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से सम्मानित किया। सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) की अतिरिक्त महानिदेशक, मेजर जनरल लिसम्मा पीवी और सिक्किम की वरिष्ठ एएनएम मधु माला गुरुंग समेत नर्सिंग कर्मियों को नर्सिंग के क्षेत्र में योगदान &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="780" height="443" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/1-7.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/1-7.jpg 780w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/1-7-768x436.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 780px) 100vw, 780px"></p>
<p> राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में 15 नर्सिंग कर्मियों को वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से सम्मानित किया।</p>
<p>सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) की अतिरिक्त महानिदेशक, मेजर जनरल लिसम्मा पीवी और सिक्किम की वरिष्ठ एएनएम मधु माला गुरुंग समेत नर्सिंग कर्मियों को नर्सिंग के क्षेत्र में योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया।</p>
<p>वायुसेना ने एक्स पर पोस्ट कर मेजर जनरल लिसम्मा को बधाई दी। पुरस्कार पाने वालों में लद्दाख, महाराष्ट्र, मिजोरम, सिक्किम, उत्तराखंड, बंगाल, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप सहित देश के विभिन्न हिस्सों से छह सहायक नर्स दाइयों (एएनएम) और नौ नर्सें शामिल हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा, नर्सिंग कर्मी सेवा के उच्चतम मानकों का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और अक्सर सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मैं सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देती हूं।</p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी मौजूद रहे।राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कारों की स्थापना 1973 में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने की थी।</p>
<p>यह पुरस्कार प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस हर 12 मई को ही दिए जाते हैं। इस पुरस्कार में प्रमाण पत्र, एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार और एक पदक शामिल है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कई स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में नर्सें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ट्रंप ने कैमरन हैमिल्टन को दोबारा सौंपी FEMA की जिम्मेदारी</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/160425/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 12:32:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को कैमरन हैमिल्टन को फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (FEMA) का नेतृत्व करने के लिए नामित किया। यह पूर्व नेवी सील के लिए एक चौंकाने वाली वापसी है, जिन्हें पिछले साल FEMA के अस्थायी प्रमुख के पद से हटा दिया गया था, क्योंकि उन्होंने एजेंसी के अस्तित्व का बचाव किया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="908" height="518" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/6-16.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/6-16.jpg 908w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/6-16-768x438.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 908px) 100vw, 908px"></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को कैमरन हैमिल्टन को फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (FEMA) का नेतृत्व करने के लिए नामित किया। यह पूर्व नेवी सील के लिए एक चौंकाने वाली वापसी है, जिन्हें पिछले साल FEMA के अस्थायी प्रमुख के पद से हटा दिया गया था, क्योंकि उन्होंने एजेंसी के अस्तित्व का बचाव किया था।</p>
<p><strong>ट्रंप प्रशासन ने FEMA को खत्म करने के संकेत दिए थे<br /></strong>उनका नामांकन ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप प्रशासन ने लगातार संकेत दिए कि, FEMA को खत्म कर दिया जाएगा। बता दें कि, यह वही एजेंसी है जिसकी राष्ट्रपति ने कड़ी आलोचना की थी। वहीं, अगर उनके नामांकन की पुष्टि हो जाती है, तो हैमिल्टन आपातकालीन प्रबंधन के मामलों में ट्रंप और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी मार्कवेन मुलिन के मुख्य सलाहकार होंगे।</p>
<p>एजेंसी ने तीन अस्थायी प्रमुखों का कार्यकाल देखा है, जिसमें जनवरी से मई 2025 तक हैमिल्टन का संक्षिप्त कार्यकाल भी शामिल है। वह एक ऐसी संकटग्रस्त एजेंसी की कमान संभालेंगे, जहां मौजूदा समय में उथल-पुथल भरी स्थिति है। इसके साथ ही हैमिल्टन को यह सुनिश्चित करना होगा कि, एजेंसी गर्मियों की आपदाओं के मौसम के लिए तैयार हो; जो बस कुछ ही सप्ताह दूर है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ट्रंप की बड़ी धमकी; ईरान के परमाणु ठिकानों पर US स्पेस फोर्स का पहरा</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/160411/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:31:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई भी इन परमाणु ठिकानों के पास पहुंचने की कोशिश करेगा तो अमेरिकी सेना उसे तुरंत ‘उड़ा देगी।’ स्वतंत्र पत्रकार शेरिल एटकिसन को दिए इंटरव्यू &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="755" height="445" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/3-12.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई भी इन परमाणु ठिकानों के पास पहुंचने की कोशिश करेगा तो अमेरिकी सेना उसे तुरंत ‘उड़ा देगी।’</p>
<p>स्वतंत्र पत्रकार शेरिल एटकिसन को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की स्पेस फोर्स इन ठिकानों की निगरानी कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर कोई उस जगह के करीब पहुंचा तो हमें तुरंत पता चल जाएगा और हम उसे खत्म कर देंगे।” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी स्पेस फोर्स इतनी सटीक निगरानी कर सकती है कि किसी भी व्यक्ति का नाम, पता और पहचान तक पता चल सकती है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">‘ईरान सैन्य रूप से हार चुका’</h2>
<p>ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक खत्म हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब प्रभावी नौसेना, वायुसेना या एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य और रणनीतिक संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचा है और अगर अमेरिका अभी पीछे हट जाए, तब भी ईरान को दोबारा मजबूत होने में करीब 20 साल लग सकते हैं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी सेना ने अब तक अपने लगभग 70 प्रतिशत लक्ष्यों को नष्ट कर दिया है। हालांकि उन्होंने संकेत दिए कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका अगले दो हफ्तों तक और सैन्य कार्रवाई कर सकता है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">परमाणु हथियारों को लेकर दोहराया विरोध</h2>
<p>ट्रंप ने कहा कि दुनिया ‘पागल शासन’ को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दे सकती। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध दोहराते हुए कहा कि यह पूरे मध्य पूर्व और इजरायल के लिए खतरा है।</p>
<p>उन्होंने 2015 में हुए परमाणु समझौते (जेसीपीओए) से अमेरिका के बाहर निकलने के अपने फैसले का बचाव भी किया। ट्रंप ने कहा कि अगर वह उस समझौते से बाहर नहीं आते तो ईरान परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर सकता था। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने ईरान को कई दशक पीछे धकेल दिया है और अब भी वॉशिंगटन की नजर ईरान की हर गतिविधि पर बनी हुई है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिमंत बिस्वा सरमा फिर बनेंगे असम के CM, 12 मई को लेंगे शपथ</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/160405/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:31:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://ameerbharat.com/NewsArticle/160405/</guid>

					<description><![CDATA[असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार को हिमंत बिस्वा सरमा को असम का मुख्यमंत्री नियुक्त किया। इससे राज्य में लगातार तीसरी बार राजग सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया। सरमा अब 12 मई को शपथ लेंगे। इससे पूर्व सरमा को केंद्रीय पर्यवेक्षक व मंत्री जेपी नड्डा और सह पर्यवेक्षक हरियाणा के सीएम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="769" height="443" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/6-13.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार को हिमंत बिस्वा सरमा को असम का मुख्यमंत्री नियुक्त किया। इससे राज्य में लगातार तीसरी बार राजग सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया। सरमा अब 12 मई को शपथ लेंगे।</p>
<p>इससे पूर्व सरमा को केंद्रीय पर्यवेक्षक व मंत्री जेपी नड्डा और सह पर्यवेक्षक हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सरमा ने राजग नेताओं के साथ लोकभवन में जाकर राज्यपाल आचार्य से मुलाकात की और सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया।</p>
<p>साथ ही अपने समर्थन में 102 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपा। राज्य के मुख्य सचिव रवि कोटा द्वारा हस्ताक्षरित एक अधिसूचना में कहा गया, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के खंड (1) के तहत असम के गवर्नर उन्हें प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा को असम का मुख्यमंत्री नियुक्त करने में प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं।”</p>
<h2 class="wp-block-heading">समारोह में शामिल हो सकते हैं पीएम मोदी</h2>
<p>इससे पहले लोकभवन की ओर से कहा गया था कि गवर्नर ने डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा को असम में नई सरकार बनाने के लिए बुलावा दिया है। आचार्य मंगलवार को सरमा को मुख्यमंत्री के रूप में और मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।</p>
<p>समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। केंद्रीय पर्यवेक्षक नड्डा ने कहा कि सरमा को रविवार को हुई विधायक दल की बैठक में भाजपा नेतृत्व वाले राजग का नेता चुना गया।</p>
<p>पूर्व मंत्री रंजीत कुमार दास, अजानता निओग, अशोक सिंघल और पिजुश हजारिका समेत आठ भाजपा विधायकों ने सरमा का नाम पार्टी विधायक दल के नेता के रूप में प्रस्तावित किया। असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने भी सरमा के नामांकन का समर्थन किया।</p>
<p>सरमा ने गठबंधन नेता के रूप में चुने जाने के बाद कहा कि अगली सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए अधिक उत्साह के साथ काम करेगी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी असम के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और भारी जनादेश इसी का नतीजा है। उन्होंने इसके लिए राज्य की जनता का आभार जताया।</p>
<h2 class="wp-block-heading">असम में राजग का यह लगातार तीसरा कार्यकाल</h2>
<p>सरमा का दूसरा राजग का असम में यह लगातार तीसरा कार्यकाल होगा। भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन ने पहली बार 2016 में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में सत्ता संभाली थी। इसके बाद 2021 में मुख्यमंत्री सरमा के नेतृत्व में राजग सरकार रही। अब सरमा एक बार फिर सीएम की शपथ लेने जा रहे हैं।</p>
<p>वह राज्य के पहले गैर-कांग्रेस मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं जो दो लगातार कार्यकाल सेवा देंगे। राजग ने विधानसभा चुनावों में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। 126 सदस्यीय सदन में रिकार्ड 102 सीटें जीती हैं। भाजपा ने 82 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी एजीपी और बीपीएफ ने 10-10 सीटें हासिल कीं।</p>
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		<title>समुद्र के रास्ते भारत लौटने का खुलेगा नया रास्ता</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/160407/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:31:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[मध्य पूर्व में जारी संकट के बीच भारतीय नागरिकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालने का एक नया रास्ता तैयार किया जा रहा है। इसको लेकर भारत और UAE एक ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं, जिससे फुजैरा बंदरगाह के रास्ते लाखों भारतीय कामगारों को निकालने में मदद मिलेगी। यह समझौता दोनों देशों के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="773" height="441" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/8-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/8-3.jpg 773w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/8-3-768x438.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 773px) 100vw, 773px"></p>
<p>मध्य पूर्व में जारी संकट के बीच भारतीय नागरिकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालने का एक नया रास्ता तैयार किया जा रहा है। इसको लेकर भारत और UAE एक ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं, जिससे फुजैरा बंदरगाह के रास्ते लाखों भारतीय कामगारों को निकालने में मदद मिलेगी। यह समझौता दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत द्विपक्षीय संबंधों में एक और अहम कड़ी साबित होगा।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी 15 मई को यूरोप के लिए रवाना होंगे। इस यात्रा के दौरान वे फुजैरा में रुकेंगे और फिर नीदरलैंड्स जाएंगे। यात्रा के पहले चरण में वह फुजैरा पोर्ट पर यूएई के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच यह दोनों देशों के लिए ऐसा पहला समझौता होगा।</p>
<h2 class="wp-block-heading">होर्मुज के पश्चिम में स्थित है फुजैरा पोर्ट</h2>
<p>इसकी वजह यह है कि फुजैरा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य'(Strait of Hormuz) के पश्चिम में स्थित है, जो इस युद्ध के दौरान एक मुख्य ‘चोक- प्वाइंट’ (अवरोधक बिंदु) के रूप में उभरा है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, यदि हवाई यातायात में किसी तरह की बाधा आती है, तो UAE में काम करने वाले लाखों भारतीयों को जहाजों के जरिए सुरक्षित निकाला जा सकता है।</p>
<p>पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय कामगार रहते हैं, जिनमें से लगभग 43 लाख कामगार अकेले UAE में मौजूद हैं। मौजूदा संघर्ष के दौरान, फुजैरा जिसे प्रस्तावित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे का संभावित शुरुआती बिंदु माना जा रहा था। अब UAE तक सामान पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी काम कर रहा है। इसकी वजह यह है कि दुबई बंदरगाह तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">एशियाई प्रीमियम शुल्क को लेकर मिलेगा भारत को लाभ</h2>
<p>इसके साथ ही सामान की ढुलाई के लिए ‘खोर फक्कन’ नामक एक अन्य बंदरगाह का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां से सामान को सड़क मार्ग के जरिए आगे भेजा जाता है। ईरान ने ठीक इसी वजह से फुजैरा को अपना निशाना बनाया है। पीएम की यह यात्रा UAE के प्रति भारत के समर्थन का संकेत है, क्योंकि UAE पर लगातार ईरान की ओर से हमले हो रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब UAE ने ओपेक नामक शक्तिशाली तेल-कार्टेल से खुद को अलग कर लिया है। माना जा रहा है कि सऊदी अरब के साथ कुछ मतभेदों के चलते UAE ने यह कदम उठाया है।</p>
<p>पिछले कुछ सालों में भारत और UAE के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से भारत को काफी फायदा पहुंच सकता है। यह फायदा विशेष रूप से इसलिए भी अहम है, क्योंकि सऊदी अरब जैसे देश अपने द्वारा बेचे जाने वाले कच्चे तेल पर एशियाई देशों से एशियाई प्रीमियम (अतिरिक्त शुल्क) भी वसूलते हैं।</p>
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		<title>ऑपरेशन सिंदूर पर आसिम मुनीर ने फिर बोला झूठ</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/160409/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:31:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पिछले वर्ष भारत के साथ हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को ‘दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई’ करार दिया है। रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय में ‘मारका-ए-हक’ की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समारोह में मुनीर ने यह बयान दिया। पाकिस्तान ने पिछले साल छह से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="780" height="440" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/1-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/1-5.jpg 780w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/1-5-768x433.jpg 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/1-5-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 780px) 100vw, 780px"></p>
<p>पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पिछले वर्ष भारत के साथ हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को ‘दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई’ करार दिया है। रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय में ‘मारका-ए-हक’ की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समारोह में मुनीर ने यह बयान दिया।</p>
<p>पाकिस्तान ने पिछले साल छह से 10 मई के बीच हुए इस संघर्ष को ‘मारका-ए-हक’ का नाम दिया है। समारोह को संबोधित करते हुए मुनीर ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की रणनीति भारत की तुलना में ‘श्रेष्ठ’ थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया, जिसका जवाब पाकिस्तान ने ‘राष्ट्रीय एकता और सैन्य शक्ति’ के साथ दिया।</p>
<h3 class="wp-block-heading">मल्टी-डोमेन युद्ध पर फोकस</h3>
<p>मुनीर के अनुसार, यह केवल दो सेनाओं के बीच का पारंपरिक युद्ध नहीं, बल्कि एक वैचारिक निर्णायक युद्ध था। भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब युद्ध ‘मल्टी-डोमेन’ (बहु-आयामी) होंगे।</p>
<p>इसके लिए पाकिस्तान अपनी सैन्य तकनीक, हार्डवेयर और प्रशिक्षण को आधुनिक बना रहा है। उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए ‘विश्वसनीय प्रतिरक्षा’ पर जोर दिया और हेंगोर-श्रेणी की पनडुब्बियों, नए राकेट बल और लड़ाकू विमानों की खरीद जैसे आधुनिकीकरण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।</p>
<p>पाक मंत्री ने खुद को मुनीर का ‘साधारण कार्यकर्ता’ बताया, बयान पर विवाद शुरू पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान खुद को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की टीम का एक ”साधारण कार्यकर्ता” बताया।</p>
<h3 class="wp-block-heading">तेल की कीमतों में गिरावट</h3>
<p>अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ जनता तक पहुंचाने के वादे के बीच दिए गए इस बयान ने इंटरनेट मीडिया पर हंगामा खड़ा कर दिया है।</p>
<p>आलोचकों का तर्क है कि एक मंत्री द्वारा सेना प्रमुख को अपना नेता मानना पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य हस्तक्षेप और ‘हाइब्रिड’ शासन व्यवस्था को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इंटरनेट मीडिया पर लोग इसे लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ और सैन्य प्रतिष्ठान को खुश करने की कोशिश बता रहे हैं।</p>
</div>
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		<title>PM मोदी आज करेंगे कर्नाटक और तेलंगाना का दौरा</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/160359/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 09:31:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कर्नाटक और तेलंगाना का दौरा करेंगे। इस दौरान वह बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग की 45वीं सालगिरह के समारोह में भाग लेंगे और हैदराबाद में लगभग 9,400 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन कर उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार, प्रधानमंत्री &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="780" height="444" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/45-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/45-5.jpg 780w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/45-5-768x437.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 780px) 100vw, 780px"></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कर्नाटक और तेलंगाना का दौरा करेंगे। इस दौरान वह बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग की 45वीं सालगिरह के समारोह में भाग लेंगे और हैदराबाद में लगभग 9,400 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन कर उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे।</p>
<p>प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार, प्रधानमंत्री सबसे पहले सुबह करीब 11 बजे बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर के समारोह में शामिल होंगे। इसके बाद वह हैदराबाद जाएंगे, जहां वह दोपहर करीब 3 बजे एक विशाल सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।</p>
<p><strong>आर्ट ऑफ लिविंग की 45वीं सालगिरह<br /></strong>गुरुदेव श्री श्री रविशंकर द्वारा 1981 में स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग आज 182 देशों में संचालित वैश्विक, स्वयंसेवक-संचालित मानवीय और शैक्षिक संगठन बन चुका है। पीएम मोदी इस संगठन की 45वीं सालगिरह के साथ-साथ श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मदिन के समारोह में भी शिरकत करेंगे।</p>
<p>बेंगलुरु कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में नवनिर्मित ध्यान मंदिर का उद्घाटन करेंगे, जिसे आंतरिक शांति और समग्र कल्याण के लिए एक विशेष स्थान के रूप में तैयार किया गया है। इसके अलावा, वह मानसिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक परिवर्तन पर केंद्रित राष्ट्रव्यापी सेवा पहलों की भी शुरुआत करेंगे।</p>
<p><strong>हैदराबाद में विकास का महाकुंभ<br /></strong>हैदराबाद में प्रधानमंत्री कई बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य कनेक्टिविटी को मजबूत करना, लॉजिस्टिक्स में सुधार लाना और आर्थिक विकास को नई गति देना है।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय राजमार्ग-167 का चौड़ीकरण</strong>: पीएम मोदी 3,175 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले हैदराबाद-पणजी आर्थिक गलियारे पर गुडेबेलूर से महबूबनगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-167 (NH-167) को फोर-लेन बनाने की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना से यात्रा के समय में लगभग डेढ़ घंटे की कमी आएगी और तेलंगाना व कर्नाटक के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।</p>
<p><strong>जहीराबाद औद्योगिक क्षेत्र</strong>: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत हैदराबाद-नागपुर औद्योगिक गलियारे के हिस्से के रूप में संगारेड्डी जिले में जहीराबाद औद्योगिक क्षेत्र की भी आधारशिला रखेंगे। 3,245 एकड़ में फैले और 2,350 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित होने वाले इस प्रोजेक्ट से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश आने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>टेक्सटाइल, रेलवे और ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा<br />पीएम मित्रा पार्क</strong>: प्रधानमंत्री वारंगल में पीएम मित्रा पार्क का उद्घाटन करेंगे, जिसे काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क के रूप में भी जाना जाता है। इसे लगभग 1,700 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य केंद्र के 5F विजन फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन के तहत भारत के कपड़ा क्षेत्र को मजबूत करना है।</p>
<p><strong>रेलवे परियोजनाएं</strong>: प्रधानमंत्री लगभग 1,535 करोड़ रुपये की रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसमें 118 किमी लंबी काजीपेट-विजयवाड़ा मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना और काजीपेट रेल अंडर रेल बाईपास परियोजना शामिल हैं। इनका उद्देश्य ट्रेनों की भीड़भाड़ कम करना और परिचालन दक्षता में सुधार करना है।</p>
<p><strong>पेट्रोलियम टर्मिनल</strong>: पीएम मोदी हैदराबाद में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के मलकापुर टर्मिनल प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार इस टर्मिनल का उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की क्षमता बढ़ाना और क्षेत्र की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करना है।</p>
<p><strong>सिंधु अस्पताल</strong>: स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री हैदराबाद में सिंधु अस्पताल का लोकार्पण करेंगे। यह कैंसर के इलाज पर केंद्रित एक मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी और गैर-लाभकारी संस्थान है। 21 लाख वर्ग फुट में फैले इस अस्पताल में 1,500 बेड, 29 ऑपरेशन थिएटर और 33 से अधिक सुपर स्पेशियलिटीज की विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद हैं।</p>
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