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	<title>देश-विदेश &#8211; Ameer Bharat | अमीर भारत</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment News</description>
	<lastBuildDate>Sat, 27 Jun 2026 12:32:29 +0000</lastBuildDate>
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		<title>प्रधानमंत्री मोदी आज से सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161276/</link>
		
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		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 12:32:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पीएम नरेन्द्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा करेंगे। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर पीएम की यह यात्रा हो रही है। पीएम मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इस दौरान भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="724" height="407" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-37.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-37.jpg 724w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/1-37-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 724px) 100vw, 724px"></p>
<p>पीएम नरेन्द्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा करेंगे। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर पीएम की यह यात्रा हो रही है। पीएम मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।</p>
<p>इस दौरान भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी और नौसेना के दो जहाज समारोह में भाग लेंगे। ज्ञात हो, मोदी इससे पहले वर्ष 2015 में सेशेल्स गए थे। पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्गों पर बढ़ते तनाव ने वैश्विक समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">सेशेल्स का रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है</h2>
<p>ऐसे में सेशेल्स का रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है। हिंद महासागर में पश्चिमी हिस्से में स्थित द्वीपीय देश सेशेल्स भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा व व्यापार मार्गों की दृष्टि से अहम है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और अफ्रीका से आयात करता है।</p>
<p>ये आयात मुख्यतः हिंद महासागर के समुद्री मार्गों से होते हैं। सेशेल्स इनके पास स्थित है। साथ ही चीन सेशेल्स को अपने प्रभाव में लाने की कोशिशें कर रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन अपनी आर्थिक व रणनीतिक पहुंच बढ़ाता जा रहा है। सेशेल्स के साथ भारत के संबंध ऐतिहासिक हैं।</p>
<p>दोनों देश समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी, रक्षा क्षमता निर्माण और आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। फरवरी 2026 में सेशेल्स के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान सतत विकास, आर्थिक वृद्धि व सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने को लेकर दृष्टि प्रपत्र जारी किया गया था।</p>
<p>पीएम मोदी इस यात्रा में राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करने के साथ ही क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विमर्श करेंगे। सेशेल्स के साथ भारतीय नौसेना की भागीदारी समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेगी।</p>
<p>हिंद महासागर क्षेत्र में भारत खुद को नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में देखता है। सेशेल्स जैसी जगहों पर मजबूत साझेदारी से भारत समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना चाहता है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद जेडी वेंस की चेतावनी</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161278/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 12:32:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाज पर हुए हमले को लेकर एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान को चेतावनी दी है कि अगर हमला किया तो उसका जवाब हमले से दिया जाएगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="682" height="396" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/2-16.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाज पर हुए हमले को लेकर एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान को चेतावनी दी है कि अगर हमला किया तो उसका जवाब हमले से दिया जाएगा।</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चेतावनी देते हुए लिखा, “अगर ईरान ने हिंसा किया तो हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा।” उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि अगर उन्हें समझौते के क्रियान्वयन को लेकर कोई असहमति है, तो वे फोन कर सकते हैं। लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा।</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि वाशिंगटन ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते का सम्मान किया है, लेकिन चेतावनी दी कि किसी भी तरह की और आक्रामकता का बलपूर्वक जवाब दिया जाएगा।</p>
<h2 class="wp-block-heading">IRGC ने दी थी चेतावनी</h2>
<p>ईरान की सेना IRGC ने कहा कि उसने ईरान पर हुए अमेरिकी हमलों के बदले खाड़ी में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया है। ईरानी टीवी के अनुसार, IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका फिर से कोई सैन्य कार्रवाई करेगा तो ईरान का जवाब और भी सख्त होगा। उन्होंने कहा, “अगर दोबारा हमला हुआ तो हमारा जवाब इससे भी बड़ा होगा।”</p>
<p>इसी के जवाब में अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने की प्रतिक्रिया आई है, जिसमें उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अगर ईरान हिंसा करेगा तो उसका जवाब हिंसा से दिया जाएगा।</p>
<p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कामर्शियल जहाज पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले किए हैं। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के नए हमलों की निंदा करते हुए अमेरिका पर सीजफायर उल्लंघन करने का आरोप लगाया।</p>
<p>IRGC ने कहा कि हमले के जवाब में उसकी नौसेना ने उन ठिकानों को निशाना बनाया जहां क्षेत्र में अमेरिकी सेना तैनात है। वहीं, ईरान की संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने अमेरिकी कार्रवाई को युद्धविराम का घोर उल्लंघन बताया और कहा कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यह दिखा दिया है कि उन्हें बातचीत या सीजफायर के सिद्धांतों के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं है।</p>
</div>
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			</item>
		<item>
		<title>दुनियाभर में घटी ट्रंप की लोकप्रियता</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161248/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 09:32:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक रेटिंग पर उनकी टैरिफ समेत तमाम नीतियों और ईरान युद्ध का गहरा असर पड़ा है। उनकी न केवल दुनियाभर में लेाकप्रियता घटी है बल्कि विश्व मामलों के संभालने को लेकर उनकी नीतियों पर दुनिया का भरोसा कम हुआ है। प्यू रिसर्च सेंटर के एक ताजा सर्वे के अनुसार, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="682" height="384" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/697yiu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/697yiu.jpg 682w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/697yiu-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 682px) 100vw, 682px"></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक रेटिंग पर उनकी टैरिफ समेत तमाम नीतियों और ईरान युद्ध का गहरा असर पड़ा है। उनकी न केवल दुनियाभर में लेाकप्रियता घटी है बल्कि विश्व मामलों के संभालने को लेकर उनकी नीतियों पर दुनिया का भरोसा कम हुआ है।</p>
<p>प्यू रिसर्च सेंटर के एक ताजा सर्वे के अनुसार, दुनियाभर में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में भारी कमी आई है और 76 प्रतिशत लोगों ने उनके नेतृत्व पर भरोसा नहीं जताया है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">ट्रंप की लोकप्रियता घटी</h3>
<p>मंगलवार को जारी सर्वे नतीजों के अनुसार, केवल 23 प्रतिशत प्रतिभागियों ने वैश्विक मामलों के समाधान में ट्रंप के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। जबकि 24 देशों में से 16 में उनके प्रति विश्वास में कमी आई है और किसी भी देश में इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई है।</p>
<p>आठ फरवरी से 13 मई तक किए गए इस सर्वे में 36 देशों के 42,151 लोगों ने हिस्सा लिया। जहां तक भारत की बात है तो यहां 39 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ट्रंप के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त किया है, जबकि 36 प्रतिशत ने भरोसा नहीं जताया।</p>
<p>पिछले साल भारत में 51 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा जताया था। सर्वे में हिस्सा लेने वाले 51 प्रतिशत भारतीयों ने वैश्विक मामलों को संभालने में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर विश्वास जताया है।</p>
<p>इजरायल में 81 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अमेरिका के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया और 66 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें यकीन है कि ट्रंप वैश्विक मामलों में सही कदम उठाएंगे।</p>
<p>तीन यूरोपीय देशों फ्रांस, जर्मनी और ग्रीस में भी ट्रंप की रेटिंग में गिरावट आई है। मुस्लिम बहुल देशों में भी अन्य नेताओं की तुलना में ट्रंप की लोकप्रियता में काफी गिरावट आई है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">टैरिफ नीति नहीं आई पसंद</h3>
<p>सर्वे के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति सबसे कम पसंद की जाने वाली नीतियों में एक थी, जिसे केवल 18 प्रतिशत ने ही सही माना, जबकि 32 प्रतिशत ने अमेरिका की आव्रजन नीति को अच्छा बताया है।</p>
<p>ट्रंप की टैरिफ नीति को व्यापक रूप से अलोकप्रिय माना गया है। इस नीति को ब्रिटेन में 27 प्रतिशत, कनाडा में 17 प्रतिशत, जापान में 15 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया में 14, मेक्सिको में 11 प्रतिशत और जर्मनी में केवल आठ प्रतिशत मंजूरी मिली है। इस मामले में केवल केन्या ही ऐसा देश रहा, जहां 55 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप के टैरिफ का समर्थन किया है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Passport Rule: पासपोर्ट की अहमियत पर उठे 4 बड़े सवाल, नागरिकता का प्रमाण नहीं तो जांच की जरूरत क्यों?</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161240/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 09:32:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत में विदेश यात्रा करने वाले हर नागरिक के लिए पासपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। बिना वैध पासपोर्ट के किसी भी भारतीय नागरिक को अधिकांश देशों की यात्रा करने की अनुमति नहीं मिलती। हालांकि, पासपोर्ट को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही होता है &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="900" height="500" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/image-1.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/image-1.png 900w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-1-768x427.png 768w" sizes="auto, (max-width: 900px) 100vw, 900px"></p>
<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://images.openai.com/static-rsc-4/zmhQFiBdDBSmQj_4oJX7rAt5GFWM4gdJfKW6LqTcslX-KO8F1Nfo23Qwyq2DSK65Mo2sUTjb-39J7iP3_Vf0yrP0vhUj4mS7efUE_awpSh6fJlzxMrcNdYojSvkMpz52z8gGsJLRv-Qf0cCzyH-wSEh0hSiBddYRcuM-tXp3lLs?purpose=inline" alt="https://images.openai.com/static-rsc-4/1zcX7Ns5IU1tJdY19_fOUQ92FkxhPyhuegrj_ixjZ3Pt_GZKswOa5lyLwVqplcLcSGdctS3MvXpoiP37KqabBL2l7DMH-LL3hG42IBVUl8qK7xK5kQW3P8NL9HpmA1ADCyvuJZTR4PGP6IXuE8sZz42zOG3-XNVYHcPgBJPqf0okNa7FM_GJ9N7aq9lWubBE?purpose=fullsize"></figure>
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<p>भारत में विदेश यात्रा करने वाले हर नागरिक के लिए <strong>पासपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज</strong> माना जाता है। बिना वैध पासपोर्ट के किसी भी भारतीय नागरिक को अधिकांश देशों की यात्रा करने की अनुमति नहीं मिलती। हालांकि, पासपोर्ट को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, तो फिर इसे बनवाने के लिए इतनी सख्त जांच और पुलिस वेरिफिकेशन क्यों किया जाता है?</p>
<p>दरअसल, पासपोर्ट केवल यात्रा का दस्तावेज नहीं बल्कि सरकार की ओर से जारी किया गया एक आधिकारिक प्रमाणपत्र है, जो विदेश में आपकी पहचान स्थापित करता है। इसके पीछे कई कानूनी और सुरक्षा संबंधी नियम भी जुड़े हुए हैं।</p>
<p>आइए जानते हैं पासपोर्ट से जुड़े चार बड़े सवाल और उनके जवाब।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">1. क्या पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण है?</h2>
<p>यह सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है।</p>
<p>कानूनी रूप से <strong>पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण (Conclusive Proof of Citizenship) नहीं माना जाता।</strong></p>
<p>पासपोर्ट इस आधार पर जारी किया जाता है कि आवेदन के समय उपलब्ध दस्तावेजों और जांच के आधार पर आवेदक भारतीय नागरिक प्रतीत होता है। यदि बाद में किसी मामले में नागरिकता पर विवाद उत्पन्न होता है, तो सरकार अलग से जांच कर सकती है।</p>
<p>यानी पासपोर्ट पहचान और अंतरराष्ट्रीय यात्रा का आधिकारिक दस्तावेज है, लेकिन नागरिकता तय करने का अंतिम आधार नहीं।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">2. अगर नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं, तो पुलिस वेरिफिकेशन क्यों?</h2>
<p>यह सवाल भी अक्सर उठता है।</p>
<p>पासपोर्ट जारी करने से पहले सरकार कई पहलुओं की जांच करती है, जैसे—</p>
<ul class="wp-block-list">
<li>आवेदक की वास्तविक पहचान</li>
<li>स्थायी और वर्तमान पता</li>
<li>आपराधिक रिकॉर्ड</li>
<li>राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तथ्य</li>
<li>फर्जी दस्तावेजों की जांच</li>
</ul>
<p>पुलिस वेरिफिकेशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि गलत पहचान या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कोई व्यक्ति पासपोर्ट हासिल न कर सके।</p>
<p>इस प्रक्रिया से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की विश्वसनीयता भी बनी रहती है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">3. पासपोर्ट सरकार की संपत्ति क्यों माना जाता है?</h2>
<p>बहुत कम लोग जानते हैं कि <strong>पासपोर्ट व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं बल्कि भारत सरकार की संपत्ति होता है।</strong></p>
<p>यही कारण है कि—</p>
<ul class="wp-block-list">
<li>सरकार जरूरत पड़ने पर पासपोर्ट रद्द कर सकती है।</li>
<li>पासपोर्ट जब्त किया जा सकता है।</li>
<li>गलत जानकारी देने पर पासपोर्ट निरस्त हो सकता है।</li>
<li>पासपोर्ट का दुरुपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।</li>
</ul>
<p>पासपोर्ट पर साफ लिखा होता है कि यह भारत सरकार द्वारा जारी किया गया दस्तावेज है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">4. किन परिस्थितियों में पासपोर्ट रद्द या जब्त किया जा सकता है?</h2>
<p>भारतीय कानून के अनुसार कई परिस्थितियों में सरकार पासपोर्ट को निलंबित (Suspend) या रद्द (Cancel) कर सकती है।</p>
<p>इनमें प्रमुख कारण हैं—</p>
<ul class="wp-block-list">
<li>फर्जी दस्तावेज देकर पासपोर्ट बनवाना</li>
<li>गलत जानकारी देना</li>
<li>राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला</li>
<li>अदालत के आदेश</li>
<li>गंभीर आपराधिक मामलों में कार्रवाई</li>
<li>पासपोर्ट अधिनियम के नियमों का उल्लंघन</li>
</ul>
<p>ऐसी स्थिति में व्यक्ति को विदेश यात्रा करने में भी कठिनाई हो सकती है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h1 class="wp-block-heading">पासपोर्ट बनवाने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?</h1>
<p>सामान्य तौर पर आवेदन के समय निम्न दस्तावेज मांगे जाते हैं—</p>
<ul class="wp-block-list">
<li>आधार कार्ड</li>
<li>जन्म प्रमाण पत्र (जहां आवश्यक हो)</li>
<li>पैन कार्ड (कुछ मामलों में)</li>
<li>निवास प्रमाण</li>
<li>वोटर आईडी</li>
<li>ड्राइविंग लाइसेंस (यदि लागू हो)</li>
<li>अन्य आवश्यक दस्तावेज</li>
</ul>
<p>दस्तावेज आवेदक की श्रेणी और आवेदन के प्रकार के अनुसार बदल सकते हैं।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h1 class="wp-block-heading">पासपोर्ट बनवाते समय इन बातों का रखें ध्यान</h1>
<ul class="wp-block-list">
<li>आवेदन में सही जानकारी भरें।</li>
<li>मोबाइल नंबर और ईमेल सक्रिय रखें।</li>
<li>सभी दस्तावेज अपडेट रखें।</li>
<li>पुलिस वेरिफिकेशन के समय उपलब्ध रहें।</li>
<li>किसी भी दलाल या फर्जी एजेंट से बचें।</li>
<li>पासपोर्ट खोने पर तुरंत पुलिस और पासपोर्ट कार्यालय को सूचना दें।</li>
</ul>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h1 class="wp-block-heading">विदेश यात्रा में पासपोर्ट क्यों सबसे जरूरी है?</h1>
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="900" height="500" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/image-1.png" alt="" class="wp-image-171565" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/image-1.png 900w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-1-768x427.png 768w" sizes="auto, (max-width: 900px) 100vw, 900px"></figure>
<p>पासपोर्ट केवल यात्रा की अनुमति नहीं देता बल्कि विदेश में भारतीय नागरिक की पहचान भी स्थापित करता है। किसी आपात स्थिति में भारतीय दूतावास भी पासपोर्ट के आधार पर ही सहायता प्रदान करता है। एयरपोर्ट इमिग्रेशन, वीजा, होटल चेक-इन और कई देशों में पहचान के लिए भी यही सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>
<p>पासपोर्ट केवल विदेश जाने का टिकट नहीं, बल्कि भारत सरकार द्वारा जारी एक संवेदनशील और कानूनी दस्तावेज है। हालांकि यह भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता, लेकिन इसकी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पुलिस वेरिफिकेशन, दस्तावेज जांच और अन्य सुरक्षा प्रक्रियाएं अनिवार्य हैं। इसलिए पासपोर्ट बनवाते समय हमेशा सही जानकारी दें और सभी कानूनी नियमों का पालन करें।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? समझें 14 हजार किमी दूर वेनेजुएला में आए भूकंप से क्या है कनेक्शन</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161242/</link>
		
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		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 09:32:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारत के तेजी से बढ़ते तेल व्यापार के लिए नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था, लेकिन यहां आए भूकंप के चलते बिजली कटौती, परिवहन व्यवस्था में बाधा और बंदरगाहों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="711" height="387" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/uoitoi.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारत के तेजी से बढ़ते तेल व्यापार के लिए नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था, लेकिन यहां आए भूकंप के चलते बिजली कटौती, परिवहन व्यवस्था में बाधा और बंदरगाहों पर आपातकालीन प्रतिबंधों के कारण माल ढुलाई कई दिनों या हफ्तों तक धीमी हो सकती है।</p>
<p>वेनेजुएला में यह आपदा ऐसे समय में आई है, जब मिडिल ईस्ट (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में तनाव के कारण भारत तेल आपूर्ति में व्यवधान का सामना कर रहा था। कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है, जिसके कारण उम्मीद जगी थी कि तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी व्यवधान आखिरकार कम हो जाएगा। लेकिन अब वेनेजुएला में आए तूफान ने भारत के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।</p>
<p>ईडीएमई इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल हेड ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज कुणाल खन्ना के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेजुएला हाल ही में कच्चे तेल के एक प्रमुख स्रोत के रूप में उभरा है। भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेजुएला बहुत कम समय में एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बन गया है।</p>
<p>लेकिन यहां आए भूंकप से हुए नुकसान के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ सकता है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">वेनेजुएला से तेल आयात में आई थी बड़ी बढ़ोतरी</h2>
<p>मिडिल ईस्ट संकट के बीच भरतीय रिफाइनरी कंपनियों ने हाल के महीनों में वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में भारी वृद्धि की है। अप्रैल और मई के दौरान वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में भारी उझाल आया, जिससे वेनेजुएला भारत के सबसे महत्वपूर्ण कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है।</p>
<p>कुणाल खन्ना के अनुसार, वेनेजुएला में आए भूकंप के कारण भले निर्यात टर्मिनल सुरक्षित हैं, लेकिन बिजली गुल होने, सड़क और परिवहन नेटवर्क क्षतिग्रस्त होने और बंदरगाहों पर आपात प्रतिबंध लगने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। वेनेजुएला के प्रमुख कार्गो बंदरगाह ला गुआइरा को आपदा क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। इससे शिपिंग और पोर्ट संचालन को लेकर चिंता बढ़ गई है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम?</h2>
<p>अब लोगों के मन में सवाल यह है कि क्या इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, इसका सीधा जवाब नहीं है। लेकिन इसके कारण जहाजों को माल लोड करने में अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। रूट बदलने के कारण डेमरेज शुल्क भी बढ़ सकता है।</p>
<p>शिपिंग में होने वाली देरी के कारण जहाजों का किराया और बीमा मिलकर तेल की लागत बढ़ा सकते हैं। इन अतिरिक्त खर्चों का सीधा असर कारोबारियों, रिफाइनरियों और बीमा कंपनियों पर पड़ेगा। इसके कारण सीधे तौर पर तो पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ सकते। लेकिन अगर भंकप के कारण उत्पन्न हुआ यह गतिरोध लंबा खींचता है तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी होगी।</p>
<h2 class="wp-block-heading">बीमा कंपनियों के लिए भी चुनौती</h2>
<p>कुणाल खन्ना के अनुसार, वेनेजुएला से आने वाले जहाजों के लिए बीमा पॉलिसियां अब तक मुख्य रूप से भू-राजनीतिक और प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं. लेकिन अब भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी जोखिम का बड़ा कारण बन गई हैं। क्योंकि अब इस समुद्री मार्ग का आकलन प्राकृतिक आपदाओं के नजरिए से भी करना होगा।</p>
<h2 class="wp-block-heading">भारत के आर्थिक और परिचालन हितों पर असर</h2>
<p>इसके अलावा भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश ने भी वेनेजुएला के तेल परियोजनाओं में निवेश किया हुआ है। यदि लंबे समय तक उत्पादन या निर्यात प्रभावित रहता है तो भारत के आर्थिक और परिचालन हितों पर भी असर पड़ सकता है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">पीएम मोदी और वेनेजुएला के बीच बातचीत</h2>
<p>हाल ही में पीएम मोदी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से बातचीत की थी। पीएम मोदी और रोड्रिगेज ने भारतीय कंपनियों के लिए वेनेजुएला के खनन, महत्वपूर्ण खनिज, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर भी चर्चा की थी। हालांकि, अब भूकंप के कारण इन योजनाओं में बदलाव संभावना दिख रही है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>उत्तराखंड और हिमालयी राज्यों में भूकंप के झटके आने से पहले मिलेगा अलर्ट</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161244/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 09:32:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के पास भी भूकंप की पहले से सटीक भविष्यवाणी करने वाली कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं है। हालांकि, भारत ने हिमालयी क्षेत्र में ऐसे भूकंपीय निगरानी नेटवर्क और क्षेत्रीय भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणालियां विकसित की हैं, जो भूकंप शुरू होने के तुरंत बाद और खतरनाक झटके पहुंचने से कुछ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="596" height="364" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/yuiu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के पास भी भूकंप की पहले से सटीक भविष्यवाणी करने वाली कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं है। हालांकि, भारत ने हिमालयी क्षेत्र में ऐसे भूकंपीय निगरानी नेटवर्क और क्षेत्रीय भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणालियां विकसित की हैं, जो भूकंप शुरू होने के तुरंत बाद और खतरनाक झटके पहुंचने से कुछ सेकंड पहले लोगों को अलर्ट कर सकती हैं।</p>
<p>अर्ली वार्निंग सिस्टम को और बेहतर बनाने की दिशा में सबसे सफल प्रयास आईआईटी रुड़की ने उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर किया है। दोनों ने मिलकर भूदेव नाम का एक अत्याधुनिक भूकंप पूर्व चेतावनी ऐप विकसित किया है। यह ऐप भूकंप के खतरों से निपटने और स्थानीय लोगों की सुरक्षा व लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करता है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">हिमालयी क्षेत्रों में रियल-टाइम मॉनिटरिंग</h2>
<p>सरकार ने बीते दिसंबर में संसद को बताया था कि पूरे हिमालयी क्षेत्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम को समर्पित रियल-टाइम भूकंपीय नेटवर्क शुरू किया गया है। इसके साथ ही, नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी क्षेत्रीय डेटा का उपयोग करके प्रोटोटाइप ईईडब्ल्यू एल्गोरिदम विकसित और टेस्ट कर रहा है।</p>
<p>इसके जरिए पी-वेव की सटीक पहचान, भूकंप की तीव्रता का तेजी से अनुमान और झटके आने से पहले की सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी।</p>
<h2 class="wp-block-heading">कैसे काम करता है अर्ली वार्निंग सिस्टम?</h2>
<p>जब भी कोई भूकंप आता है, तो उसमें से पी-वेव्स निकलती हैं। ये तरंगें सबसे तेजी से यात्रा करती हैं और आमतौर पर कम नुकसान पहुंचाती हैं। ईईडब्ल्यू सिस्टम भूकंप के एपिसेंटर के पास इन्हीं शुरुआती पी-वेव्स को पकड़ लेता है।</p>
<p>इसके बाद, विनाशकारी तरंगों के पहुंचने से पहले ही दूर स्थित इलाकों में अलर्ट भेज दिया जाता है। इस तकनीक से प्रशासन और आम लोगों को सायरन बजाने या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए कुछ बेहद कीमती सेकंड मिल जाते हैं।</p>
<p>इस सिस्टम से मिलने वाला चेतावनी का समय इस बात पर पूरी तरह निर्भर करता है कि कोई शहर या इलाका भूकंप के केंद्र से कितनी दूर है।</p>
<p>इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप भूकंप के केंद्र के बिल्कुल करीब हैं, तो आपको चेतावनी का समय नहीं के बराबर मिलेगा। वहीं, अगर भूकंप का केंद्र सैकड़ों या हजारों किलोमीटर दूर है, तो बचाव के लिए कुछ अतिरिक्त और बेहद अहम सेकंड मिल सकते हैं।</p>
<h2 class="wp-block-heading">भारत में कहां लगे हैं सेंसर?</h2>
<p>भारत में यह सेंसर नेटवर्क मुख्य रूप से उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में स्थापित किया गया है। इन सेंसरों को जानबूझकर सक्रिय फॉल्ट जोन के बहुत करीब रखा गया है।</p>
<p>जब ये सेंसर पी-वेव्स को डिटेक्ट करते हैं, तो तेज झटके आने से पहले आसपास के शहरों में अलर्ट भेज देता  है। दुनिया के अन्य देशों की बात करें तो फिलहाल जापान, ताइवान और अमेरिका के पास सबसे उन्नत भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणालियां मौजूद हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>होर्मुज में फिर बढ़ी टेंशन: ओमान ने तेल टैंकरों के लिए खोला नया रूट</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161246/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 09:32:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं और साठ दिनों के अंतरिम युद्धविराम के दौरान खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर से गहरा गया है। यह नया विवाद ओमान द्वारा तेल टैंकरों के लिए एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग की घोषणा के बाद शुरू हुआ। ईरान ने इस नए मार्ग को लेकर कड़ी चेतावनी जारी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="722" height="392" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/hgfj.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं और साठ दिनों के अंतरिम युद्धविराम के दौरान खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर से गहरा गया है। यह नया विवाद ओमान द्वारा तेल टैंकरों के लिए एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग की घोषणा के बाद शुरू हुआ। ईरान ने इस नए मार्ग को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की थी, लेकिन इसके बावजूद कई जहाज इस रास्ते से गुजरने लगे।</p>
<p>इसी बीच, गुरुवार को इस नए रूट से गुजर रहे एक जहाज पर मिसाइल से हमला किए जाने की खबर सामने आई है। हालांकि, ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र ने पुष्टि की है कि इस हमले में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">ओमान का टोल-फ्री कॉरिडोर</h2>
<p>ओमान ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन(आईएमओ) के समर्थन से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक अस्थायी समुद्री कॉरिडोर उपलब्ध कराया है। इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसमें जहाजों से किसी भी प्रकार का ट्रांजिट शुल्क या टोल नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर, ईरान लंबे समय से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा देने के बदले शुल्क वसूलने की वकालत कर रहा था।</p>
<p>ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स(आईआरजीसी) ने ओमान के इस नए मार्ग को पूरी तरह अवैध करार दिया है। आईआरजीसी का स्पष्ट कहना है कि होर्मुज में केवल वे ही मार्ग मान्य होंगे जिन्हें तेहरान ने निर्धारित किया है, और इन रास्तों से बाहर जाने वाले जहाजों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">टोल टैक्स पर अमेरिका का सख्त रुख</h2>
<p>अमेरिका ने ईरान द्वारा टोल वसूलने के किसी भी संभावित प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में होर्मुज जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की बात शामिल होती है, तो यह अमेरिका को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगा और यह गेम चेंजर साबित होगा।</p>
<p>इसी बीच, बहरीन में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की बैठक में पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी चेतावनी दी कि यदि ईरान यहां टोल लगाता है, तो इसका असर दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्गों पर भी पड़ सकता है।</p>
<p>इसके अलावा, ट्रंप ने ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में अमेरिका का हाथ होने से इनकार करते हुए कहा कि वहां कई मिसाइलें दागी गई थीं और यह स्पष्ट नहीं है कि वे मिसाइलें किसने दागी थीं।</p>
<h2 class="wp-block-heading">अमेरिकी सीनेट में ट्रंप की जीत</h2>
<p>इन अंतरराष्ट्रीय तनावों के बीच राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को घरेलू राजनीति में एक बड़ी राहत मिली है। ट्रंप की सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में 24 घंटे के भीतर ही गिर गया। मतदान से पहले ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों के साथ बैठक कर नाराजगी जताई थी। इस जीत से व्हाइट हाउस को ईरान के साथ बातचीत में एक मजबूत राजनीतिक बढ़त हासिल हुई है।</p>
<p>वहीं दूसरी ओर, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ लड़ाई में नाटो देशों के असहयोगात्मक रवैये पर कड़ी निराशा जताई है। उन्होंने नाटो प्रमुख मार्क रुटे से स्पेन, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों के रवैये की आलोचना की। अपनी सैन्य ताकत का दावा करते हुए ट्रंप ने यहाँ तक कहा कि अमेरिका चाहे तो वह वेनेजुएला को एक घंटे में और ईरान को महज एक हफ्ते के भीतर खत्म कर सकता है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नीट-यूजी री-एग्जाम पर पीएम मोदी संतुष्ट</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161222/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2026 12:33:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया और नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने नीट पुनर्परीक्षा का उदाहरण देते हुए विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय पर बल दिया और समस्याओं के समाधान के लिए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="717" height="404" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-24.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-24.jpg 717w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/6-24-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 717px) 100vw, 717px"></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया और नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने नीट पुनर्परीक्षा का उदाहरण देते हुए विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय पर बल दिया और समस्याओं के समाधान के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।</p>
<p>पश्चिम एशिया संकट के दौरान भी प्रधानमंत्री ने ऊर्जा की कमी से आम जनता को होने वाली परेशानी को रोकने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय के महत्व पर बल दिया था।</p>
<p>उन्होंने इससे पहले ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा भारतीयों को सहायता प्रदान करने के लिए सभी मंत्रालयों के संयुक्त और समन्वित प्रयासों का आह्वान किया था।</p>
<p>पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद ऊर्जा स्थिति पर जानकारी प्रदान करने के लिए सरकार ने अंतर-मंत्रालयी समूह भी गठित किए थे और नियमित रूप से बैठकें आयोजित की जाती रही हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वेनेजुएला में भूकंप से बड़ी तबाही, पीएम मोदी ने कहा- भारत हर संभव मदद के लिए तैयार</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161224/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2026 12:33:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[वेनेजुएला के उत्तरी तट के पास आए भूकंप के जोरदार झटकों ने भयंकर तबाही मचाई है। इस विनाशकारी भूकंप में अब तक 32 लोगों के मौत और 700 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। पीएम मोदी ने वेनेजुएला में आए भूकंप पर दुःख जताते हुए कहा कि वेनेजुएला में आए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="717" height="397" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/8-14.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>वेनेजुएला के उत्तरी तट के पास आए भूकंप के जोरदार झटकों ने भयंकर तबाही मचाई है। इस विनाशकारी भूकंप में अब तक 32 लोगों के मौत और 700 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है।</p>
<p>पीएम मोदी ने वेनेजुएला में आए भूकंप पर दुःख जताते हुए कहा कि वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप से हुई तबाही से बहुत दुख हुआ है। भारत के लोगों की तरफ से मैं वेनेजुएला की सरकार और वहां के लोगों के प्रति, और खासकर उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है।</p>
<p>हम घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं और इस मुश्किल समय में प्रभावित सभी लोगों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">ट्रंप ने भी किया मदद का वादा</h2>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के तुरंत बाद अमेरिकी मदद की पेशकश की। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “वेनेजुएला में शक्तिशाली भूकंप का झटका आया है। इससे बहुत बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं।</p>
<p>अमेरिका मदद के लिए तैयार और इच्छुक है। मैंने अपनी सरकार की सभी एजेंसियों को तेजी से काम करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। हम अपने नए और महान दोस्तों के साथ खड़े रहेंगे। शुरुआती रिपोर्ट अच्छी नहीं हैं।</p>
<h2 class="wp-block-heading">अमेरिका ने शुरू किया मदद का काम</h2>
<p>अमेरिका ने वेनेजुएला के लिए आपातकालीन मदद जुटाना शुरू कर दिया है। विदेशी सहायता के लिए अंडर सेक्रेटरी जेरेमी लेविन ने कहा “वेनेजुएला के लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाने और उसका तालमेल बिठाने के लिए पहले ही एक आपदा सहायता टीम और टास्क फोर्स को काम पर लगा दिया है।</p>
<p>वेनेजुएला की अंतरिम सरकार में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर, अमेरिका इस दुखद प्राकृतिक आपदा के बाद शुरुआती अहम दिनों में खोज और बचाव दल, चिकित्सा और मानवीय सहायता का सामान और अन्य संसाधन भेजेगा।”</p>
<h2 class="wp-block-heading">एक के बाद एक 20 से अधिक झटके</h2>
<p>बता दें कि वेनेजुएला में एक के बाद एक भूकंप के दो शक्तिशाली झटके महसूस किए गए। एक मिनट के अंतराल में आए 7.1 और 7.5 तीव्रता के भूकंप ने भीषण तबाही मचाई है। भूकंप के झटकों से दहशत में चीख-पुकार मच गई। इसके बाद 20 से अधिक झटके महसूस किए गए।</p>
<h2 class="wp-block-heading">वेनेजुएला के अधिकारियों बहुत कम हताहतों की दी जानकारी</h2>
<p>बता दें कि भूकंप के दो तगड़े झटकों के 5 घंटे बीत जाने के बाद भी वेनेजुएला के अधिकारियों ने हताहतों के बारे में बहुत कम जानकारी दी है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने टीवी पर दिए भाषण में मौतों की पुष्टि तो की, लेकिन मरने वालों की आधिकारिक संख्या नहीं बताई। सरकारी मीडिया ने भी तबाही के पैमाने के बारे में सीमित जानकारी दी है।</p>
<p>यू.एस. जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, काराकस से लगभग 160 किलोमीटर (100 मील) पश्चिम में 7.2 तीव्रता का भूकंप आया और एक मिनट से भी कम समय बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा झटका महसूस किया गया।</p>
<p>USGS ने प्रॉम्प्ट असेसमेंट ऑफ ग्लोबल अर्थक्वेक रिस्पॉन्स (PAGER) सिस्टम का इस्तेमाल करके मरने वालों की संभावित संख्या 10,000 से 1,00,000 के बीच होने का अनुमान लगाया।</p>
<p>यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो के जियोफिजिसिस्ट वाशन राइट ने अल जजीरा को बताया कि PAGER संभावित असर का अनुमान लगाने के लिए भूकंप की तीव्रता, गहराई, जगह, आबादी का घनत्व, भूकंप का पुराना डेटा और इमारतों की जानकारी जैसे कारकों का तेजी से विश्लेषण करता है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>होर्मुज में नहीं लगेगा कोई टोल! ट्रंप का दावा- ईरान ने तोड़ा वादा तो तुरंत खत्म कर देंगे डील</title>
		<link>https://ameerbharat.com/NewsArticle/161202/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Jun 2026 15:32:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://ameerbharat.com/NewsArticle/161202/</guid>

					<description><![CDATA[6 होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी हलचल, ट्रंप ने किया बड़ा दावा दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक लाइनों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति गरमा गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका को आश्वस्त किया है कि वह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1422" height="800" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/image.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/image.png 1422w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-768x432.png 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-390x220.png 390w" sizes="auto, (max-width: 1422px) 100vw, 1422px"></p>
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<p>6</p>
<h2 class="wp-block-heading">होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी हलचल, ट्रंप ने किया बड़ा दावा</h2>
<p>दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक लाइनों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति गरमा गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका को आश्वस्त किया है कि वह इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का टोल, शुल्क या अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाएगा। साथ ही ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान अपने वादे से पीछे हटता है तो अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बातचीत और समझौते को तुरंत समाप्त कर दिया जाएगा।</p>
<h2 class="wp-block-heading">क्या है पूरा विवाद?</h2>
<p>विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब ईरान और ओमान के अधिकारियों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात और नौवहन सेवाओं को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह अटकलें तेज हो गईं कि ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का शुल्क या टोल लागू कर सकता है।</p>
<p>हालांकि ट्रंप ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जहाजों से कोई टोल या बीमा शुल्क नहीं लिया जाएगा और समुद्री यातायात सामान्य रूप से जारी रहेगा।</p>
<h2 class="wp-block-heading">क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?</h2>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा कॉरिडोर में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इस जलमार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का शुल्क, प्रतिबंध या सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">ट्रंप की दो टूक चेतावनी</h2>
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1422" height="800" src="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/image.png" alt="" class="wp-image-171506" srcset="https://ameerbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/image.png 1422w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-768x432.png 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-390x220.png 390w" sizes="auto, (max-width: 1422px) 100vw, 1422px"></figure>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान ने “नो टोल, नो चार्ज” का भरोसा दिया है। लेकिन यदि बाद में यह दावा गलत साबित हुआ या ईरान ने जहाजों पर शुल्क लगाने की कोशिश की तो अमेरिका समझौते को आगे नहीं बढ़ाएगा। ट्रंप का कहना है कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार की सुरक्षा अमेरिका की प्राथमिकता है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">तेल बाजार पर दिखा असर</h2>
<p>ईरान की ओर से टोल न लगाने के संकेत और अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में राहत देखने को मिली है। रिपोर्टों के अनुसार होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बढ़ी है और आपूर्ति संबंधी चिंताओं में कमी आने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर</h2>
<p>अमेरिका, यूरोपीय देशों और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय महत्व का समुद्री मार्ग है और यहां किसी भी प्रकार के एकतरफा टोल या प्रतिबंध को स्वीकार नहीं किया जाएगा। कई देशों ने मुक्त और सुरक्षित नौवहन की आवश्यकता पर जोर दिया है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">आगे क्या?</h2>
<p>फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है। ट्रंप प्रशासन इस बात पर जोर दे रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला और टोल-मुक्त रहे। वहीं दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ताएं किस दिशा में जाती हैं और क्या यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता ला पाएगा।</p>
</p>
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