अमेरिका द्वारा सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चीन ने कड़ी चेतावनी दी है। चीन का कहना है कि अगर AI का बिना किसी रोक-टोक के सैन्य उपयोग किया गया तो दुनिया ‘टर्मिनेटर’ फिल्म जैसी भयावह स्थिति में पहुंच सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का प्रशासन सैन्य क्षेत्र में AI स्टार्टअप्स के बिना शर्त इस्तेमाल की नीति आगे बढ़ा रहा है। इसी बीच अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने एलन मस्क के AI सिस्टम ग्रोक को गुप्त सैन्य सिस्टम में इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है।
लेकिन दूसरी ओर AI कंपनी एंथ्रोपिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया, क्योंकि उसने अपने ‘क्लॉड’ मॉडल को बड़े पैमाने पर निगरानी या पूरी तरह स्वचालित घातक हथियारों में इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
चीन ने क्या कहा?
चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग बिन ने कहा कि अगर सेना में एआई का असीमित इस्तेमाल किया गया और एल्गोरिद्म को जीवन-मृत्यु का फैसला करने की ताकत दी गई, तो इससे युद्ध के नैतिक नियम कमजोर होंगे और तकनीक नियंत्रण से बाहर जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो अमेरिकी फिल्म टर्मिनेटर में दिखाई गई डरावनी दुनिया एक दिन सच हो सकती है। 1984 में रिलीज हुई इस फिल्म में अभिनेता अर्नोल्ड श्वार्जनेगर ने भूमिका निभाई थी, जिसमें दिखाया गया है कि एआई से नियंत्रित रोबोट भविष्य में इंसानों के खिलाफ युद्ध छेड़ देते हैं।
पेंटागन और एंथ्रोपिक के बीच विवाद
पेंटागन और एंथ्रोपिक के बीच विवाद उस समय सामने आया जब कंपनी ने कहा कि उसकी तकनीक का इस्तेमाल न तो बड़े पैमाने पर निगरानी के लिए किया जाना चाहिए और न ही पूरी तरह स्वचालित हथियारों में। इस फैसले से पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ नाराज हो गए। इसके बाद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सभी संघीय एजेंसियों को एंथ्रोपिक की तकनीक का इस्तेमाल बंद करने का आदेश दे दिया।
कुछ ही घंटों बाद हेगसेथ ने एंथ्रोपिक को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सप्लाई-चेन जोखिम’ घोषित कर दिया और सैन्य ठेकेदारों तथा साझेदार कंपनियों को उसके साथ किसी भी तरह का व्यावसायिक काम करने से रोक दिया। हालांकि पेंटागन को अपनी प्रणाली बदलने के लिए छह महीने की अवधि दी गई है।

