सेहत

स्किन कैंसर का पता लगाने में डॉक्टरों का नया हथियार बनेगा AI

एक नए अध्ययन में बुधवार को यह बात सामने आई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उन लोगों में शुरुआती खतरे के पैटर्न की पहचान कर सकता है, जिन्हें मेलानोमा होने का ज्यादा खतरा है। एआई माडल प्रारंभिक चरण के मेलेनोमा और अन्य त्वचा कैंसर का पता लगाने में ज्यादा सटीकता दिखा सकते हैं।

यह अध्ययन स्वीडन की वयस्क जनसंख्या के लिए नियमित रूप से एकत्रित रजिस्ट्री डाटा पर आधारित था । विश्लेषण किए गए डाटा में उम्र, लिंग, निदान, दवाओं का उपयोग और सामाजिक-आर्थिक स्थिति शामिल थी। इस अध्ययन में शामिल 6,036,186 व्यक्तियों में से 38,582 (0.64 प्रतिशत) लोगों को अध्ययन के पांच वर्षों के दौरान मेलेनोमा विकसित हो गया।

एआई न केवल संदिग्ध घावों की पहचान करता है, बल्कि यह रोगी के मेटाडेटा (उम्र, लिंग) और डर्मोस्कोपिक छवियों के संयोजन का उपयोग करके उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान कर सकता है, जिससे पांच साल में कैंसर होने का अनुमान लगाया जा सकता है।

भविष्य में रजिस्ट्री डाटा को अधिक रणनीतिक उपयोग  

गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी की साहलग्रेन्स्का एकेडमी के डाक्टोरल छात्र मार्टिन गिलस्टेड्ट ने कहा कि ” अध्ययन दिखाता है कि स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में पहले से उपलब्ध डाटा का उपयोग मेलेनोमा के उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान के लिए किया जा सकता है । हमारे परिणाम स्पष्ट संकेत देते हैं कि भविष्य में रजिस्ट्री डाटा को अधिक रणनीतिक रूप से उपयोग किया जा सकता है। गिलस्टेड सैलग्रेंस्का विश्वविद्यालय अस्पताल के त्वचाविज्ञान और वेनेरोलाजी विभाग में एक सांख्यिकीविद् हैं।

जब शोधकर्ताओं ने अलग-अलग एआई माडल्स की तुलना की, तो अंतर स्पष्ट हो गया। सबसे उन्नत माडल ने उन व्यक्तियों को लगभग 73 प्रतिशत मामलों में पहचानने में सक्षम था, जिन्होंने बाद में मेलेनोमा विकसित किया, जबकि उन लोगों की पहचान नहीं हो पाईं जिन्हें यह बीमारी नहीं हुई इसकी तुलना में जब केवल उम्र और लिंग का इस्तेमाल किया गया था, तब यह आंकड़ा लगभग 64 प्रतिशत था।

पांच साल में मेलानोमा होने का जोखिम लगभग 33 प्रतिशत 

जांच-पड़ताल, दवाओं और सामाजिक-जनसांख्यिकीय डाटा के मेल से ऐसे छोटे ज्यादा जोखिम वाले समूहों की पहचान करना मुमकिन हो पाया, जिनके लिए पांच साल में मेलानोमा होने का जोखिम लगभग 33 प्रतिशत था।

गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी में डर्मेटोलाजी और वेनेरोलाजी के एसोसिएट प्रोफेसर सैम पोलेसी ने कहा कि हमारे विश्लेषण बताते हैं कि छोटे ज्यादा जोखिम वाले समूहों की चुनिंदा स्क्रीनिंग से ज्यादा सटीक निगरानी और स्वास्थ्य संसाधनों का ज्यादा असरदार इस्तेमाल, दोनों हो सकते हैं। इसमें आबादी के डाटा को ‘प्रिसिजन मेडिसिन’ में शामिल करना और क्लिनिकल जांचों को और बेहतर बनाना शामिल होगा।”

इस तरीके को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में लागू करने से पहले और अधिक शोध और नीतिगत निर्णयों की आवश्यकता है। हालांकि, परिणामों से यह पता चलता है कि बड़ी मात्रा में रजिस्ट्री डाटा पर प्रशिक्षित एआई माडल, मेलानोमा के लिए अधिक व्यक्तिगत जोखिम आकलन और भविष्य की स्क्रीनिंग रणनीतियों के लिए सहायता का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं। एआई उपकरणों का उपयोग त्वचा विशेषज्ञ द्वारा किए जाने वाले निदान के सहायक के रूप में किया जाना चाहिए, न कि उसके विकल्प के रूप में।

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