रूस के खतरे से पोलैंड सतर्क हो गया है। इसी के साथ अब सीमा पर बारूदी सुरंग बिछाएगा। उप रक्षामंत्री पावेल जालेव्स्की ने कहा कि रूस पड़ोसियों के प्रति बहुत आक्रामक इरादे रखने वाला देश है।
पोलैंड ने रूस से बढ़ते खतरे का हवाला देते हुए अपनी सीमा पर बारूदी सुरंग बिछाने का एलान किया है। यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद मध्य यूरोपीय देश विवादास्पद हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते से आधिकारिक तौर पर अलग हो गया है।
उप रक्षामंत्री पावेल जालेव्स्की ने एपी को बताया, ये बारूदी सुरंग उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के पूर्वी हिस्से में, उत्तर में रूस के साथ और पूर्व में बेलारूस के साथ लगती सीमा पर लगाई जाएंगी। हम रक्षा संरचना का निर्माण कर रहे हैं और सुरक्षा के लिए यह बहुत जरूरी है। पोलैंड को रूस से अपना बचाव करने की जरूरत है। जालेव्स्की ने कहा, रूस एक ऐसा देश है जिसके अपने पड़ोसियों के प्रति बहुत आक्रामक इरादे हैं। उसने खुद कभी अंतरराष्ट्रीय बारूदी सुरंगों पर प्रतिबंध संधि के प्रति प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
मालूम हो कि फरवरी 2022 से ही रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है। इससे अब तक दोनों पक्षों से हजारों नागरिकों व सैनिकों की जान जा चुकी है। पोलैंड इससे सतर्क है।
ओटावा संधि के तहत बारूदी सुरंगों पर था प्रतिबंध
वर्ष 1997 में बारूदी सुरंग पर प्रतिबंध संबंधी संधि को मंजूरी दी गई थी। इसे ओटावा संधि के नाम से भी जाना जाता है। यह संधि हस्ताक्षरकर्ताओं को बारूदी सुरंग रखने या बिछाने से रोकती है। कंबोडिया, अंगोला, बोस्निया और हर्जेगोविना सहित देशों के पूर्व संघर्ष क्षेत्रों में इन बारूदी सुरंगों की वजह से नागरिकों को हुई क्षति के मद्देनजर यह संधि अस्तित्व में आई थी।
2016 में नष्ट कर दी थी बारूदी सुरंग
पोलैंड ने 2012 में संधि की पुष्टि की थी। उसने 2016 में अपने सभी बारूदी सुरंग नष्ट कर दी थी। हालांकि, शुक्रवार को उसने संधि से हटने की घोषणा करते हुए कहा कि वह इन हथियारों का निर्माण फिर से शुरू करने की योजना बना रहा है।
यूक्रेन पर हमले के बाद से सतर्क हैं पड़ोसी देश
रूस की तरफ से यूक्रेन पर हमले के बाद से पड़ोसी देश सतर्क हैं और वे अंतरराष्ट्रीय संधि देश में अपनी भागीदारी का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। पिछले वर्ष वारसॉ ने फिनलैंड, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया के तीन बाल्टिक राज्यों व यूक्रेन के साथ मिलकर संधि छोड़ने की घोषणा की थी। रूस उन लगभग तीन दर्जन देशों में से एक है जो अमेरिका के साथ कभी भी ओटावा संधि में शामिल नहीं हुए हैं।
मारी जा चुकी हैं पांच हजार से ज्यादा महिलाएं व युवतियां
संयुक्त राष्ट्र महिला जिनेवा तथा मानवीय कार्रवाई की प्रमुख सोफिया कैल्टोर्प ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि फरवरी 2022 में रूसी हमले शुरू होने के बाद से यूक्रेन में 5,000 से अधिक महिलाओं और लड़कियों की मौत हो चुकी है व 14 हजार से अधिक महिलाएं-लड़कियां घायल हुई हैं।
20% यूक्रेनी क्षेत्र पर रूस का कब्जा, लोग बदहाल
करीब चार वर्षों से जारी संघर्ष के दौरान रूस ने 20 प्रतिशत से अधिक यूक्रेनी क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। इस क्षेत्र में लगभग 30-50 लाख लोग रहते हैं। रूस के नियंत्रण वाले इन क्षेत्रों में लोग आवासीय, जल, ऊर्जा, गर्मी व स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां तक रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसोन व जापोरिजिया क्षेत्र में कई वास्तव में दबाव वाली व अत्यावश्यक समस्याओं को स्वीकार किया है।


